जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ स्वामी के गृहस्थ अवस्था में नेमी कुमार की बारात का आयोजन 9 अगस्त को किया जा रहा है, उससे पूर्व ग्वालियर में अनेक स्थानों पर नेमीकुमार की बिनोली यात्रा गाजे बाजों के साथ निकाली गई। इस अवसर पर आर्यिका पूर्णमति माताजी के प्रवचन भी हुए। पढ़िए सौरभ जैन की रिपोर्ट…
ग्वालियर। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ स्वामी के गृहस्थ अवस्था में नेमी कुमार की बारात का आयोजन 9 अगस्त को किया जा रहा है, उससे पूर्व ग्वालियर में अनेक स्थानों पर नेमीकुमार की बिनोली यात्रा गाजे बाजों के साथ निकाली गई। जिसमें रथ पर सवार नेमी कुमार की जगह-जगह गोद भराई की गई।
स्वयं को कभी हीन मत समझोः हमारे जीवन में दुख का थोड़ा सा समय भी भारी और लंबा दिखता है, जबकि सुखी सागरों की आयु का पता ही नहीं चलता। जैन दर्शन के अनुसार भविष्य उज्जवल करने के लिए वर्तमान को संभालने की बात बताई जाती है। स्वयं को कभी हीन मत समझो, क्योंकि प्रत्येक आत्मा में सिद्ध बनने की शक्ति है, अपने अंतरंग अनंत गुना को पहचान का प्रयास करो।
जीवन रखो उससे पहले जीवन का अर्थ समझ लो। उक्त उद्गार आर्यिका पूर्णमति माताजी ने सिरोल चौराहा साक्षी एंक्लेव में आयोजित धर्म सभा में दिए। माताजी का दीक्षा दिवस पर तीन दिवसीय आयोजन चातुर्मास स्थल पर 9 अगस्त से प्रारंभ होगा। जिसमें बुधवार को नेमीकुमार की भव्य बारात, 10 अगस्त को नेमिकुमार को वैराग्य का चित्रण एवं माता जी का दीक्षा दिवस समारोह, 11 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।













Add Comment