बड़े जैन मंदिर में अंबाह जैन समाज संगठन के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे स्वर्गीय भरोसी लाल जैन की पुण्यतिथि के अवसर पर भगवान आदिनाथ को समर्पित भक्तामर स्तोत्र के अखंड पाठ का आयोजन श्रद्धालुओं ने किया। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…
अम्बाह। बड़े जैन मंदिर में अंबाह जैन समाज संगठन के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे स्वर्गीय भरोसी लाल जैन की पुण्यतिथि के अवसर पर भगवान आदिनाथ को समर्पित भक्तामर स्तोत्र के अखंड पाठ का आयोजन श्रद्धालुओं ने किया। यह पाठ जैन संत विगुण सागर की मंगल प्रेरणा से किया गया। आयोजन के दौरान आचार्य मानतुंग द्वारा रचित भक्तामर के श्लोकों का भक्तों ने अनवरत वाचन किया। भक्तामर पाठ संगीतमयी भक्ति के साथ किया गया।

इस पाठ का कुशल संयोजन कुमारी दीप्ति जैन ने किया। इस महाअर्चना पाठ के लिए श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा व पूजन मंत्रोच्चार के साथ किया। मांगलिक क्रियाएं शुचि दीदी ने कराईं। इस पावन अवसर पर आयोजित धर्मसभा में संत विगुण सागर जी महाराज ने कहा कि जब आचार्य मानतुंग अपने आपको जिनेंद्र प्रभु के चरणों में समर्पित करते थे तो उनके अंतर्मन से भक्ति काव्य की धारा प्रस्फुटित होती थी और इसी धारा के चलते भक्तामर महास्रोत की रचना हुई।
कहने को तो इसमें मात्र 48 श्लोक ही हैं, पर सचमुच इसकी गहराई में उतरा जाए तो भक्ति भावना से जुड़ी प्रभावी साधना का यह समूचा दर्शन है। स्वयं आचार्य मानतुंग इस काव्य की रचना करते-करते बंधनमुक्त हो गए थे। इस स्तोत्र के माध्यम से आदिनाथ भगवान की स्तुति की जाती है। वही आयोजन में 48 दीपकों के द्वारा जिनेंद्र प्रभु की महाआरती की गई। इस अवसर पर अनिल कुमार जैन बड़े, पवन कुमार जैन छोटू, रीता जैन, विमल भण्डारी, दीप्ति जैन, चीकू जैन, आकाश जैन लाला, सरस जैन, ऊषा भण्डारी आदि उपस्थित रहे।













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