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अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का रहा सानिध्य : मनाया गया भगवान आदिनाथ का जन्मकल्याणक महोत्सव


अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज,आर्यिका प्रसन्नमति माता जी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य पारसोला दिगंबर जैन समाज की ओर से भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव बड़ा मंदिर में मनाया गया। इस अवसर पर मुनि पूज्य सागर ने कहा कि हमें अपने कर्मों की निर्जरा के लिए अनुष्ठान करना चाहिए।


 

पारसोला। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज,आर्यिका प्रसन्नमति माता जी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य पारसोला दिगंबर जैन समाज की ओर से भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव बड़ा मंदिर में मनाया गया। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत विधि-विधान के साथ भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का सहस्रनाम के साथ अभिषेक किया गया। उसके बाद जल, इक्षुरस, शर्करा, नारियल, अनार, अंगूर, माल्टा, पपीता, संतरा, सेब, आम, घी, कल्पचूर्ण, हल्दी, सफेद चंदन, लाल चंदन, दूध, दही, सर्वोषधि, चार कलश, चंदन लेपन, पुष्प वृष्टि, मंगल आरती, सुगंधित जल, शांतिधारा से अभिषेक अलग-अलग श्रावकों द्वारा किया गया।

किया आदिनाथ का गुणगान

कार्यक्रम में मांडला बनाकर भक्तामर विधान किया गया, जिसमें आदिनाथ भगवान के गुणों का गुणगान किया गया। गुणगान करते हुए 48 अर्घ्य जिनेंद्र भगवान को श्रीफल चढ़ाकर समर्पित किए गए। अनेक महिलाओं और पुरुषों ने अर्घ्य समर्पित किए। अर्घ्य में श्रीफल, लड्डू, अक्षत, पुष्प चढ़ाए गए। भगवान आदिनाथ के पोते और भरत का पुत्र मरीचि ही भगवान महावीर बना। भगवान आदिनाथ के माता-पिता का नाम नाभिराय-मरुदेवी था। उनकी दो रानियां नंदा और सुनंदा थीं।

कौन हैं भगवान आदिनाथ 

जैन धर्म के इस काल के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान हैं, जिनका जन्म कल्याणक मनाया गया। भगवान आदिनाथ ने असि, मसि, कृषि, वाणिज्य, शिल्प, विद्या की शिक्षा दी थी। भगवान आदिनाथ के 101 पुत्र और पुत्रियां थीं। प्रथम पुत्र भरत प्रथम चक्रवर्ती थे, बाहुबली प्रथम कामदेव और दोनों पुत्रियां प्रथम आर्यिका थीं। आपने 72 कलाओं का उपदेश भी दिया था।

होती है कर्मों की निर्जरा

कार्यक्रम में मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि भगवान के पंचकल्याणक की तिथियों में अनुष्ठान करने असंख्यत कर्मों की निर्जरा होती है। कितने लोग आएंगे, कितने नहीं आएंगे, इन बातों का विचार कर कार्यक्रम नहीं करना चाहिए बल्कि यह समझ कर करना चाहिए कि मुझे कर्मों की निर्जरा करनी है और पुण्य का संचय करना है। शाम को बालक आदिनाथ का पालना झुलाने का कार्यक्रम और प्रवचन का कार्यक्रम होगा।

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