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जीवन को तीर्थ बनाकर जिये, ना कि तमाशा - मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज तीर्थ बनाकर जीवन जीना चाहिए,तमाशा बनाकर नहीं- मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज


 क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में लघु आदर्श श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन चल रहा है| जिसमें तीसरे दिन 21 मार्च को भक्तों ने सर्वप्रथम प्रभु का अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा की| विधान के मध्य में मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के सानिध्य में गणाचार्य श्री पुष्पदंतसागर जी महाराज का 41वां आचार्य पदारोहण दिवस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया| कार्यक्रम के शुभारंभ में आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।पढ़िए मनोज जैन बाकलीवाल कीरिपोर्ट……..


आगरा।कमला नगरमें श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के संत निलय सभागार में ग्रेटर कमला नगर सकल जैन समाज के तत्वावधान एवं क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में लघु आदर्श श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन चल रहा है| जिसमें विधान के तीसरे दिन 21 मार्च को भक्तों ने सर्वप्रथम प्रभु का अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा की| विधान के मध्य में मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के सानिध्य में गणाचार्य श्री पुष्पदंतसागर जी महाराज का 41वां आचार्य पदारोहण दिवस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया| जिसमे भक्तों ने कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया| भक्तों ने अष्ट द्रव्य की थाल सजाकर आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के चित्र को साक्षी मानकर भक्तिमय पूजन किया| इसके बाद सभी इंद्र इंद्राणियों ने पंडित मोहित जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में मंत्रोच्चारण के साथ श्रीजी के समक्ष अर्घ्य एवं श्रीफल अर्पित कर विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कीं| विधान में मौजूद सभी इंद्र-इंद्राणियों ने संगीतकार शशि जैन पाटनी के मधुर भजनों पर नृत्य किया| इस दौरान सौभाग्यशाली भक्तों ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया|

जीवन को तीर्थ बनाकर जीना चाहिए।

विधान में विराजमान क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर महाराज ने मंगल प्रवचन के दौरान कहा कि मनुष्य को अपना जीवन तीर्थ बनाकर जीना चाहिए। जीवन को तमाशा बनाकर नहीं जीना चाहिए। अगर जीवन को तुम तमाशा बनकर जियोगे तो तुम दुनिया के लिए एक तमाशा बनकर रह जाओगे। मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य को दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि हम दूसरे से सदैव सम्मान पाना चाहते हैं तो हमें भी दूसरों का सम्मान करना चाहिए| भारतीय दर्शन में सबसे ज्यादा मूल्य भावनाओं का ही होता है। विधान के समापन पर साय: 7:00 बजे संगीतमय भक्तों ने प्रभु की मंगल आरती की| विधान में समस्त सकल जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर सिद्धों की आराधना कर रहे हैं| विधान के संयोजक मनोज जैन बाकलीवाल ने बताया कि 19 मार्च से कमला नगर डी ब्लॉक जैन मंदिर में आयोजित हो रहे लघु आदर्श श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन 22 मार्च को विश्व शांति महायज्ञ के साथ किया जाएगा| विधान में प्रमुख पात्र सौधर्म इंद्र- विकास जैन,सारिका जैन,यज्ञनायक- अनुज जैन (क्रांति) आयुषी जैन,कुबेर इंद्र-विकास जैन,रुचि जैन,राजा श्रीपाल महारानी मैना सुंदरी-नीलेश जैन स्मृति जैन, चक्रवर्ती,विमल जैन, निशी जैन भूमिका निभा रहे हैं|

इस अवसरपरप्रदीपजैनपीएनसी,जगदीशप्रसादजैन,शिखरचन्द जैन सिंघई,मनोज जैन बांकलीवाल,अनिल रईस,अनिलFCI,नरेश जैन लुहाडिया,समकितजैन,हरीश जैन,दीपक जैन अभिषेक जैन,समस्त ग्रेटर कमलानगर सकलजैनसमाज के लोग बडी़ संख्या में मौजूद रहे|

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