उपाध्याय 108 श्री विहसंत सागर मुनिराज श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैसवाल जैन मंदिर में विराजमान हैं। मंदिर में सुबह अभिषेक शांतिधारा गुरुदेव के सानिध्य में संपन्न हुई। इस अवसर पर धर्मसभा भी हुई। पढ़िए राजू जैन की रिपोर्ट…
डबरा। मेडिटेशन गुरु उपाध्याय 108 श्री विहसंत सागर मुनिराज श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैसवाल जैन मंदिर में विराजमान हैं। मंदिर में सुबह अभिषेक शांतिधारा गुरुदेव के सानिध्य में संपन्न हुई। उसके उपरांत आचार्य विराग सागर महाराज का चित्रानावरण एवं दीप प्रज्वलन श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैसवाल जैन मंदिर समिति ने किया। म.प्र. सरकार के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने डबरा में गुरुदेव को श्रीफल भेंट कर मंगल आशीर्वाद लिया। जैसवाल जैन समाज द्वारा नरोत्तम मिश्रा एवं ग्रामीण जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा का शॉल पहनाकर सम्मान किया गया। मेडिटेशन गुरु उपाध्याय 108 विहसंत सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट जैन मंदिर समिति ने किया। जैन मिलन स्वतंत्र डबरा ने सकल दिगंबर जैन समाज के सहयोग से विहसंत सागर मुनिराज को डबरा में चातुर्मास कराने हेतु श्रीफल भेंट किया और गुरुदेव से निवेदन किया कि इस वर्ष डबरा में आप का चातुर्मास संपन्न हो, जिससे हमें धर्म लाभ मिल सके।

गुरुदेव ने बताया मुक्ति का मार्ग
गुरुदेव ने प्रवचन में कहा कि आचार्य पूज्य पाद स्वामी महाराज समाधि ग्रंथ में बता रहे हैं कि मुक्ति कब मिलेगी। जीवन को शांतिमय एवं सुखद धर्म में उत्साह से मन लगाकर व्यतीत करें तभी मुक्ति मिलेगी। हमें भगवान से मांगना चाहिए कि हमारा मरण हो। हमारा मरण हमारा समय धर्म ध्यान में हो, यह मांगना चाहिए। ध्यान एकाग्र चिंता निरोधो ध्यानम यानी अपनी आत्मा में लीन रहना ही मुक्ति का मार्ग है। योग और योगी में अंतर बताते हुए उन्होंने कहा कि योग मन वचन काया क्रिया से होता है। योगी तीनों को एक कर ले। निरग्रंथ योगी मन को पवित्र रखते हैं। इस अवसर पर वीरेंद्र चौधरी, कैलाश चंद जैन, मनोज कुमार राजू जैन कपड़े वाले, मनीष जैन बंटी लूशन शन वाले, जगदीश प्रसाद जैन, प्रेमचंद जैन, चंद्रशेखर जैन रानू, डॉक्टर नवीन जैन नयन, शुभम, आशीष जैन गोहद वाले मौजूद थे। मनोज जैन एकांत ने संचालन किया।













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