इंदौर। आचार्य विराग सागर जी की समाधि पश्चात पर किया आचार्य श्री सम्भव सागर जी ने अपने आचार्य पद का त्याग कर अपने शिष्य मोक्ष सागर को दिया। उन्होंने शिखर जी में एक आहार, एक उपवास, 2 आहार, 1 उपवास और मौन साधना और समाधि की साधना आचार्य श्री शान्तिसागर जैसी समाधि की साधना अंगीकार कर समाधि साधना प्रारंभ कर दी है। आप पिछले कई वर्षों से 6 रसों का त्याग कर चुके हैं।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आचार्य श्री सम्भव सागर जी ने चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी को पत्र लिखकर कहा कि मैं अपना आचार्य पद अपने शिष्य मुनि मोक्ष सागर जी को सौंपता हूं।
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