इंदौर में साधना और सृजन का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। मुनिश्री 108 शुद्धात्मसागर जी महाराज की लीफ आर्ट प्रदर्शनी 5 सितम्बर तक आयोजित की जा रही है। यह कला केवल चित्र नहीं, बल्कि साधना और आध्यात्मिक गहराई का जीवंत प्रतीक है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
इंदौर में आयोजित विशेष प्रदर्शनी में जैन समाज को एक नई आध्यात्मिक कला देखने का अवसर मिल रहा है। परम पूज्य आचार्य श्री 108 विभवसागर जी महाराज के शिष्य, मुनिश्री 108 शुद्धात्मसागर जी महाराज द्वारा निर्मित लीफ आर्ट साधना और सृजन का अद्भुत उदाहरण है।
पत्तों पर उकेरी गई यह कला साधना की गहराई और आत्मानुभूति की अभिव्यक्ति है। साधु जीवन में भौतिक साधनों का अभाव होते हुए भी आत्मिक समृद्धि इन कृतियों में झलकती है।
मुनिश्री की यह कला यह संदेश देती है कि –
• साधन सीमित हों तो भी साधना अनंत हो सकती है।
• प्रकृति का हर पत्ता दिव्य सौंदर्य समेटे हुए है, बस देखने की दृष्टि चाहिए।
• जब आत्मा में शुद्धता और हृदय में सृजनात्मकता हो तो पत्ते भी बोल उठते हैं।
समाज के अध्यक्ष संजय बड़जात्या और सचिव दिलीप जैन नमन कैटर्स ने बताया यह प्रदर्शनी 05 सितम्बर 2025 तक श्री दिगंबर जैन समाज, हाईलिंक सिटी, इंदौर में चलेगी। प्रतिदिन सुबह 9 से 10 बजे तक मुनिश्री संसंघ की दिव्य देशना का भी लाभ जैन समाजजन ले सकेंगे। यह लीफ आर्ट न केवल कला का प्रदर्शन है, बल्कि जैन साधु जीवन की सरलता, सृजन और आध्यात्मिकता का अद्वितीय प्रतीक है।













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