आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज ने आज अंजनी नगर, कालानी नगर के जिनालयों के दर्शन किए और शाम को संघ का विहार गोमट गिरी की ओर हो गया।गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण व दीप प्रज्वलन किया गया। इंदौर से पढ़िए, सतीश जैन की यह खबर…
इंदौर। महती पुण्य के प्रभाव से आपका जन्म जैन कुल में हुआ और आप आज देव, शास्त्र, गुरु की भक्ति कर रहें हैं। समयसार ग्रंथ में कुंदकुंद स्वामी महाराज से पूछा गया कि दुनिया में सबसे सुंदर चीज कौन सी है तब उन्होंने बताया कि वह है हमारी आत्मा। आत्मा ही परमात्मा बनती है। यह उद्गार आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज ने बुधवार को श्री चंद्र प्रभु मांगलिक भवन अंजनी नगर में व्यक्त किए। उन्होंने सिद्धालय में विराजमान भगवान के विषय में कहा कि हे भगवान अवगुण आपको छू तक नहीं पाए। हम आपके गुणों को नमस्कार करते हैं। हम चाहते हैं कि हमें भी आपके गुणों की प्राप्ति हो। गुरुदेव कहते हैं कि संकलेष आपके मन मस्तिष्क से निकालना है। आज भाई-भाई में, बहन-बहन में, आदमी-औरत में क्लेश है। बीमारी संकलेष से आती है। जिस घर में संकलेष रहता है। वहां से लक्ष्मी रूठ कर भाग जाती है। पहले एक व्यक्ति कमाता था, सारा घर खाता था और आज सारा घर कमाता है फिर भी हम कर्ज में हैं। आज हम सभी अपने कर्तव्यों से दूर हो गए हैं। मन में कुछ, वचन में कुछ है, इसीलिए दुखी हैं। घर से नवदा भक्ति नहीं जाना चाहिए। आज भगवान महावीर स्वामी का ज्ञान कल्याणक है। उनसे प्रार्थना करते हैं कि हमें भी जीने की कला सिखाएं।
आचार्य श्री ने जिनालयों के दर्शन किए
इस अवसर पर लघु विधान भी किया गया। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज ने आज अंजनी नगर, कालानी नगर के जिनालयों के दर्शन किए और शाम को संघ का विहार गोमट गिरी की ओर हो गया। इस अवसर पर समाज श्रेष्ठी राजेश वेद, आशीष वेद, संजय पापड़ीवाल, विनोद गंगवाल, पवन पाटोदी, सुनील गोधा, सोनू वेद, विवेक ठाकुर उपस्थित थे। प्रातः कार्यक्रम की शुरुआत राजेश वेद , सतीश जैन, संजय पापड़ीवाल, राजेश गंगवाल, पवन पाटोदी द्वारा गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के चित्र के अनावरण व दीप प्रज्वलन से हुई।













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