स्थानीय दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य धरणेन्द्र जैन ने कहा कि ऊजवनी मनाना सामाजिक एकता का प्रतीक है, जिससे परिवारों में समरसता कायम रहती है और सामूहिकता का आभास होता है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
खेरवाड़ा। स्थानीय दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य धरणेन्द्र जैन ने कहा कि ऊजवनी मनाना सामाजिक एकता का प्रतीक है, जिससे परिवारों में समरसता कायम रहती है और सामूहिकता का आभास होता है। जैन ने बताया कि दीपावली पर्व के समापन पर श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के विशाल सभागार में ऊजवनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन समाज के विभिन्न परिवारों की महिलाएं घर पर लड्डू बनाकर लाती हैं, जबकि दाल-चावल का वितरण समाज के भामाशाह द्वारा किया जाता है।
जिन परिवारों के पिछले वर्षों में किसी सदस्य का निधन हो गया है, उनके घर जाकर समाज के अध्यक्ष रमेश चंद्र कोठारी और कार्यकारिणी सदस्य मृतक के परिवार को ऊजवनी में आमंत्रित करते हैं। इस दौरान आटे में मोयन डालकर शोक समाप्त किया जाता है। धरणेन्द्र जैन ने कहा कि सभी परिवारजन समाज की एकता का प्रतीक हैं और वे संगठित होकर एक साथ रहते हैं। लगभग पचहत्तर वर्षों से यह परंपरा आज भी कायम है और दीपावली के समापन पर हर वर्ष इसका आयोजन किया जाता है।













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