सारांश: झांसी के करगुवा स्थित श्री 1008 सावँलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चमत्कारिक मूर्ति विराजित है। यहाँ दिखे सजीव सर्पों के बावजूद कोई हानि नहीं हुई — यह स्थान बना जैन श्रद्धा का अद्भुत केंद्र। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की ख़ास रिपोर्ट…
झांसी, उत्तर प्रदेश स्थित करगुवा का श्री 1008 सावँलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जैन समाज का प्राचीन एवं चमत्कारिक तीर्थ क्षेत्र है। कहा जाता है कि यहाँ भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति चमत्कारपूर्वक भूमि से प्रकट हुई थी। इस मूर्ति के समीप श्रद्धालुओं ने कई बार सजीव सर्पों को देखा, पर किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ — यही इस स्थान के अतिशय का प्रमाण है।
काले प्रस्तर की प्रतिमा श्रद्धालुओं का केंद्र बिंदु
इस मंदिर में विराजित भगवान पार्श्वनाथ की सर्पचिह्न युक्त दुर्लभ काले प्रस्तर की प्रतिमा श्रद्धालुओं का केंद्र बिंदु है। मंदिर परिसर में पाँच अन्य छोटे-छोटे मंदिर, स्वाध्याय भवन, भोजनशाला और धर्मशाला की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
बुंदेलखंड क्षेत्र में यह तीर्थ प्रमुख धार्मिक केंद्र है, जहाँ पर्वों पर विशाल धर्मसभाएँ, शोभायात्राएँ और अनुष्ठान संपन्न होते हैं। करगुवा तीर्थ, झांसी–कानपुर हाईवे पर मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित है और रेलवे स्टेशन से सिर्फ पाँच किलोमीटर दूर है।
यह स्थान श्रद्धा, चमत्कार और जैन संस्कृति का अद्भुत संगम है — एक बार अवश्य पधारें।













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