राजनीति में किया गठबंधन ज्यादा नही चलता जबकि प्रभु से किया बंधन हमेशा चलता रहता है। पंचकल्याणक उत्सव कामां नगरी में इतिहास की संरचना कर गया आज से इस नगरी को कामजय तीर्थ कामवन के नाम से जाना जाए क्योंकि यहां का राजा भी कामसेन था और यहां इस महोत्सव ने काम पर जय हुई है। स्वयं शांतिनाथ भगवान भी काम पर जय कर तीर्थंकर बने थे। ये प्रवचन सात दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम दिवस मोक्ष कल्याणक के अवसर पर जैन आचार्य सुनील सागर महाराज ने दिए। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट..
कामां। राजनीति में किया गठबंधन ज्यादा नही चलता जबकि प्रभु से किया बंधन हमेशा चलता रहता है। पंचकल्याणक उत्सव कामां नगरी में इतिहास की संरचना कर गया आज से इस नगरी को कामजय तीर्थ कामवन के नाम से जाना जाए क्योंकि यहां का राजा भी कामसेन था और यहां इस महोत्सव ने काम पर जय हुई है। स्वयं शांतिनाथ भगवान भी काम पर जय कर तीर्थंकर बने थे। ये प्रवचन सात दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतिम दिवस मोक्ष कल्याणक के अवसर पर जैन आचार्य सुनील सागर महाराज ने दिए। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के अनुसार सात दिवसीय आयोजन का समापन कार्यकर्ताओ, पात्रों के सम्मान समारोह एवं छात्र-छात्राओं के अधिवेशन के साथ हुआ। बाहर से पधारे हुए अतिथियों का अभिनंदन किया गया तो अन्य संस्थाओं के पदाधिकारियों का भी स्वागत किया गया।
छात्र- छात्राओं का हुआ अधिवेशन
पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव में निजी शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं का अधिवेशन आचार्य सुनील सागर महाराज के सानिध्य में हुआ तो निजी शिक्षण संस्थान आदर्श विद्या मंदिर, जीनियस पब्लिक स्कूल, विकास सेंट्रल, तिलक बाल, हरिकृपा विद्यालय, आदर्श जीवन शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राओं को सम्पूर्ण मति माताजी, संपन्न मति माताजी ने सम्बोधन करते हुए कहा कि पिता के द्वारा पीटा गया पुत्र, सुनार के द्वारा पीटा गया सोना हमेशा आभूषण बनते हैं। इस अवसर पर आचार्य ने कहा कि हमेशा ऊंची सोच रखो व कड़ी मेहनत करो। इस अवसर पर पूर्व सांसद रामस्वरूप कोली उपस्थित रहे।
सम्मान समारोह हुआ आयोजित
समापन से पूर्व पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में बने हुए पात्रों का सम्मान एवं विशेष योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान रविंद्र जैन ने कहा कि कामां में अभूतपूर्व आयोजन हुआ है, जिसमें सभी की भूमिका सराहनीय रही। रथ यात्रा में भगवान की हुई वापसी समापन समारोह के बाद कार्यक्रम स्थल हस्तिनापुर नगरी से रथ यात्रा में विराजमान होकर संपूर्ण नगर में भ्रमण करते हुए भगवान की। वापसी शांतिनाथ दिगंबर जैन दीवान मंदिर में हुई तो नवीन प्रतिमाओं को जयकारों के साथ वेदी पर विराजमान किया गया।
कामवन बस्ती का जताया आभार
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव कामां के महामंत्री संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि सम्पूर्ण कामवन बस्ती की भागीदारी से यह महोत्सव इतिहास गढ़ने के साथ साथ जन-जन का बना और एक सुखद याद छोड़ने में कामयाब रहा। आचार्य सुनील सागर महाराज ने गदगद हो संपूर्ण कामां नगरी को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित व्यापार महासंघ, रेडीमेड यूनियन, किराना संघ, सर्व समाज, खंडेलवाल,अग्रवाल , ब्राह्मण,सैनी, पंजाबी, यादव, गुर्जर,मेव आदि सर्वसमाज, भोजन वितरण व्यवस्था में कामवन जीव सेवा समिति, खण्डेलवाल मित्र मंडल, जायन्ट्स ग्रुप ऑफ कामवन, यथार्थ सेवा समिति, अपनाघर सेवा समिति सहित सभी सामाजिक संस्थाए,निजी शिक्षण संस्थान आदर्श विद्या मंदिर, जीनियस, विकास सेंट्रल, तिलक बाल, हरिकृपा विद्यालय, आदर्श जीवन शिक्षण संस्थान,
आवास व्यवस्था में एमपीएस पब्लिक स्कूल, बृज बाल निकेतन विद्यालय, अग्रवाल धर्मशाला, खण्डेलवाल धर्मशाला, राधा वाटिका, सचिन शर्मा सहित सम्पूर्ण कामवन बस्ती एवं गीता खंडेलवाल के नेतृत्व में नगर पालिका प्रशासन द्वारा अभूतपूर्व सहयोग प्रदान किया गया तो वहीं पुलिस व प्रशासन ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। प्रतिष्ठा समिति द्वारा सभी का आभार प्रकट किया गया।













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