मुनिश्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों राघौगढ़ में विराजित हैं। यहां उनके प्रवचन हो रहे हैं। इसका बड़ी संख्या में धर्मावलंबी भाग लेकर लाभ उठा रहे हैं। राघौगढ़ से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर…
राघौगढ़। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों राघौगढ़ में विराजित हैं। यहां उनके प्रवचन हो रहे हैं। इसका बड़ी संख्या में धर्मावलंबी भाग लेकर लाभ उठा रहे हैं। मुनिश्री ने कहा कि उमा स्वामी ने तत्त्वार्थसूत्र में कहा- तुम्हें किसी भी वस्तु से तभी मिलेगा जब क्या उसने तुम्हारे लिए कुछ किया है। जिसने अभिषेक मात्र अपने लिए किया है, वह गंधोदक मात्र उसी के काम आएगा तो अभिषेक करते समय आपको संकल्प करना पड़ेगा। ये अभिषेक आप किसके लिए कर रहे है? जिसके लिए कर रहे हैं, वो गंधोदक की एनर्जी उसके पास पहुंच जाएगी, चाहे भले ही वह अस्पताल में कोमा में क्यों न पड़ा हो।
नौकरी है तो एक छुट्टी बचाकर रखना
वार्षिक महोत्सव में जो अभिषेक करते हैं, वह गंधोदक भली एक व्यक्ति बनाये लेकिन, पूरी समाज के एक-एक बच्चे को वह गंधोदक लेना चाहिए। सालभर में तुम किसी दिन आओ या न आओ अभिषेक में, सालभर गंधोदक लो या न लो, उस दिन जरूर आना क्योंकि उस दिन जो कुछ भी होगा, वो पूरी समाज के लिए होगा। वो गंधोदक तुम्हें सालभर में इतनी एनर्जी देगा कि तुम किसी व्यक्ति विशेष के गंधोदक को पूरी सालभर भी लोगे तो उतना काम नहीं करेगा, जो वार्षिक महोत्सव का गंधोदक काम करता है। उस महोत्सव में उस दिन महानुभाव आप अपना घर छोड़कर मत जाना, मात्र जाना है तो इससे बड़ा कोई धर्म कार्य हो जैसे सम्मेद शिखर, आहारदान आदि हो। नौकरी है तो एक छुट्टी बचाकर रखना, यात्रा की एक छुट्टी रखना।
उस दिन के भगवान तुम्हारे लिए उठे हैं
आज पूरे समाज के लिए भगवान बाहर आयंेगे, पूरी समाज के लिए भगवान पांडुकशिला पर बैठेंगे, आज पूरे समाज के लिए गंधोदक बनेगा। उस दिन का गंधोदक प्रत्येक समाज के माथे पर जाना चाहिए। पूरी समाज यदि उस गंधोदक को लगा लेती है, कल आप देखना पूरी समाज में ऐसे अच्छे कार्य होंगे क्योंकि पूरी समाज ने वह गंधोदक लगाया जो पूरी समाज के लिए बनाया गया था। सालभर में कभी अभिषेक करो या न करो, दशलक्षण पर्व में भी अभिषेक करों या न करो लेकिन समाज के प्रत्येक पुरूष वर्ग को वार्षिक महोत्सव का कलशाभिषेक जरूर करना चाहिए क्योंकि उस दिन के भगवान तुम्हारे लिए उठे हैं। ये मूर्ति भक्त के नमोस्तु के अनुसार रंग बदलती है, आज भगवान को किसलिए उठाया है, बस भगवान उतना ही काम करेंगे। महिलाओं से मेरा कहना है और किसी दिन का अभिषेक देखो या न देखो लेकिन, उस दिन का अभिषेक जरूर देखना वह तुम्हारे लिए है। उस दिन का गंधोदक जरूर लगाना।
पारसनाथ अपना सब कुछ छोड़कर बचाने पहुँच गए
जिसने ये भावना भायी है कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति सुखी रहे, संसार के प्रत्येक व्यक्ति का हंसता हुआ चेहरा रहें, सारा संसार हरा भरा रहे, किसी की आंख में आंसू न आए, कोई दुखी न रहें, ऐसी भावना भाई है जिन्होंने और इसी भावना से जिन्होंने अभिषेक किया है, जिसने साधना की है, ऐसा जो जीव है, उसी का नाम तीर्थंकर है और उन्ही के मंदिर बनते हैं। तीर्थंकर की पूजा करने से तुम्हारे संकट दूर होंगे क्योंकि, तीर्थंकर बनते समय उन्होंने यही भावना भायी थी कि मैं सारे जगत को सुखी कर सकूँ। पारसनाथ को संकट मोचक दुनिया इसीलिए कहती है क्योंकि, सारी दुनिया देखकर जिन्हें मारती है, उन्हें बचाने के लिए पारसनाथ अपना सब कुछ छोड़कर बचाने पहुँच गए।
तुम्हारी गोदी में तीर्थंकर, तद्भव मोक्षगामी, चक्रवर्ती खेलेंगे
घर से शुरू करो- मम्मी पापा किसके लिए? मेरे लिए, जो मम्मी पापा तेरे काम तो आ जाएंगे लेकिन, तू कभी अच्छे बेटों के बाप नहीं बन पाएगा क्योंकि तूने मम्मी पापा को अपने लिए माना है, मम्मी पापा की सेवा कर रहा है अपने लिए। मकान बना रहा है अपने लिए, जाओ मकान कभी किसी और के काम नहीं आएगा, उस घर में तू अकेला रहेगा, परिवार के लोग भी नहीं रह पाएंगे, वह मकान बेटों को भी नहीं फलेगा। धन कमाया किसके लिए? अपने लिए, वह धन तुम्हारा काम आएगा और तुम्हारे साथ ही खत्म हो जाएगा। अब थोड़ा सा परिवर्तन करों- मम्मी पापा मेरे लिए नहीं है, मैं मम्मी पापा के लिए हूँ, जैसे ही तुम यह भाव करोगे, एक दिन तुम्हारी गोदी में तीर्थंकर, तद्भव मोक्षगामी, चक्रवर्ती खेलेंगे। मकान बनाते समय चाहिए कि यह मकान मैं अपने परिवार के लिए बना रहा और हो सके तो ये मकान मैं मुनिराज के आहार कराने के लिए बना रहा हूँ।













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