सनावद में मुनि श्री विश्व सूर्य सागर और साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में ज्याप अनुष्ठान का आयोजन हुआ, जिसमें समाजजनों ने आहुति अर्पित कर आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाया। पढ़िए सन्मति जैन काका की पूरी रिपोर्ट…
सनावद। नगर में चार्तुमार्त विराजमान मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में जैन धर्म की प्रभावना हेतु मंत्र ज्याप अनुष्ठान का भव्य आयोजन हुआ।
सन्मति जैन काका ने जानकारी देते हुए बताया कि संत निलय में आचार्य शांति व सागर वर्धमान देशना के दौरान दोपहर में मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज की प्रेरणा से मंत्र ज्याप अनुष्ठान सम्पन्न हुआ।
दिव्य आत्माओं की उपस्थिति में वंदना करने से मोक्ष मार्ग सुलभ होता है
मुनि श्री ने बताया कि जैसे बिना इच्छा के भोजन करने पर भी पेट भरता है, वैसे ही बिना विशेष मनोभाव के भी भगवान का नाम लेने से पुण्य और कर्मों की निर्जरा होती है। उन्होंने कुंदकुंद स्वामी, समंतभद्र आचार्य और आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज की ध्यान साधना का उल्लेख किया और कहा कि जब भगवान पार्श्वनाथ ने स्वर्ण भद्र कूट पर ध्यान किया था, तुरंत निर्वाण प्राप्त हुआ था। ऐसी दिव्य आत्माओं की उपस्थिति में वंदना करने से मोक्ष मार्ग सुलभ होता है। इस अवसर पर जैन समाज के सभी श्रद्धालुओं ने 108 आहुति देकर ज्याप अनुष्ठान सम्पन्न किया और आत्मिक कल्याण की भावना के साथ धर्म का लाभ लिया।













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