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जिस दिन दिगंबर मुद्रा का अंत होगा उस दिन अग्नि का भी विनाश हो जाएगा : आचार्य श्री सुंदरसागर

आज का विचार

 

जैसे गुलाब जामुन को खाने से स्वाद आता है उसी तरह जिन धर्म अपनाने से ही पुण्य मिलता है

न्यूज सौजन्य-कुणाल जैन

प्रतापगढ़। शुक्रवार को भगवान महावीर के समोशरण में 12 सभाएं लगीं, परंतु भगवान महावीर स्वामी अपनी आत्मा में लीन थे। चारों दिशा से भक्तजनों का आना अनवरत रहा और कहने लगे कि भगवान हमको देख रहे हैं पर भगवान महावीर स्वामी तो अपनी आत्मा में लीन हैं, वो तो अपने आप को देख रहे हैं। गौतम स्वामी चार ज्ञान के धारी, उन्होंने भगवान से निवेदन किया कि- हे! भगवन इस चौथे काल में धर्म की अमृत वर्षा हो रही है, क्या पंचम काल में भी ऐसी धर्म की वर्षा होगी? महावीर स्वामी ने ओंकार ध्वनि में गौतम गणधर को बताया- जहां तक जिस भी काल तक जैन धर्म होगा। वहां तक संसार और जैन धर्म के लोग होंगे और जब जैन धर्म नहीं रहेगा, उस दिन यह सृष्टि नष्ट हो जाएगी। आचार्य श्री सुंदरसागर महाराज ने चातुर्मास प्रवचन के दौरान यह बात कही।

जैन कुल में जन्म लेने पर गर्व करें
भव्यआत्माओं ! आपको स्वाभिमान होना चाहिए कि आपने जैन कुल में जन्म लिया, गर्व होना चाहिए कि आप जैन हैं, आपको जैन शासन मिला। जब तक वितराग मुद्रा है तुम्हारे घर में अग्नि का वास है। जिस दिन दिगंबर मुद्रा का अंत हो जाएगा उस दिन अग्नि का भी विनाश हो जाएगा। जिस दिन अग्नि नहीं होगी तो चूल्हा नहीं चलेगा और चूल्हा नहीं जलेगा, रोटी नहीं बनेगी और पूरे विश्व में अग्नि के बिना त्राहि-त्राहि हो जाएगी। जैसे ही मुनि मुद्रा का विनाश होगा तो छटा काल शुरू हो जाएगा ।

भूत, भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान सुधारें
अभी अवसर है योग्यता है, पात्रता भी है, सुधर जाओ। सुधर गए तो सीधा विमान आएगा देवलोक में जाओगे और अगर बिगड़ गए तो सीधा सातवें नरक में जाओगे। आपका भविष्य क्या है यह तो केवल और केवल भगवान ही जानते हैं। कोई फिक्र मत करना भूत, भविष्य की चिंता नहीं करना क्योंकि भूत तो बीत गया, भविष्य में क्या होगा इसका निर्धारण वर्तमान से ही होगा इसलिए अपना वर्तमान सुधारें। कुछ समय ही मिला है आपको आज जैन कुल में है अनंतानंत पुण्य बंध करके आये होंगे तो ये कुल शासन मिला।

जिनशासन को व्यर्थ न जाने दें
जिनशासन के अंदर जैन कुल में जन्म मिल जाए ऐसी भावना भाई थी। अब इस जिनशासन को व्यर्थ ना जाने दें। जैसे गुलाब जामुन देखने से स्वाद नहीं आता, खाओगे तो ही स्वाद आएगा। वैसे ही जिन धर्म देखने से स्वाद नहीं आएगा जैन धर्म में जैन धर्म का स्वाद देखना है तो उनके बताए मार्ग पर चलकर शासन नायक बने, यानी पथ पर चलना होगा। भूत मेरा क्या है ? जाने दो भविष्य क्या होगा ? चिंता मत करो वर्तमान जो है उसे सुधारना है। अपनी आत्मा में रहना सीखे, वितराग मुद्रा देखकर भी आपको यदि वितरागता नहीं आती तो आपका जैन कुल में जन्म लेना व्यर्थ हो जाएगा। आप सब का मंगलमय हो।

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