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भक्तामर दीप आराधना में श्रद्धालुओं ने की प्रभावना वितरित: जिनेंद्र अभिषेक रिद्धिमंत्र पूर्वक शांतिधारा 


श्री आदिनाथ चैत्यालय स्कीम-71 में भक्तामर महा आराधना करते हुए दीप अर्चना भक्ति हुई। प्रतिदिन अनवरत भक्तामर दीप आराधना भी शाम को 7.15 बजे हो रही है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के शताब्दी वर्ष तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के हीरक जयंती महोत्सव पर 75 दिवसीय आराधना के दौरान 48 वें दिन 48 दीपकों से आराधना की गई। पढ़िए इंदौर से यह खबर…


इंदौर। श्री आदिनाथ चैत्यालय स्कीम-71 में भक्तामर महा आराधना करते हुए दीप अर्चना भक्ति की गई। यहां प्रतिदिन सुबह 6.30 बजे जिनेंद्र अभिषेक के बाद रिद्धिमंत्र से शांतिधारा होती है। चैत्यालय के संरक्षक आरती-सनत जैन ने बताया कि भगवान आदिनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के बाद से प्रतिदिन अनवरत भक्तामर दीप आराधना भी शाम को 7.15 बजे से की जा रही है। जिनेंद्र आरती, गुरुभक्ति के बाद दीप आराधना होती है। प्रतिदिन अलग-अलग भक्त प्रभावना वितरित करते हैं। रविवार पाठ के पुण्यार्जक चैतन्य, अवनिश पंचोलिया ने बताया कि एक साथ सामूहिक रूप से प्रभु भक्ति, पाठ करने से असंख्य कर्मों की निर्जरा होती है। हम सभी सदस्य पूर्व के उपार्जित पुण्य के कारण प्रभु चरणों में बैठकर भक्ति कर रहे हैं। अध्यक्ष महेंद्र जैन, सुनील जैन ने आदिनाथ चैत्यालय के बारे में कहा कि ये चैत्यालय बहुत प्राचीन है। इसकी स्थापना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के आशीर्वाद तथा मुनि श्री चारित्र सागर जी की पावन प्रेरणा से हुई थी।

48 वें दिन 48 दीपकों से आराधना

प्रतिदिन भक्तों की उपस्थिति में यहां अभिषेक पूजन और विभिन्न कार्यक्रम होते हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के शताब्दी वर्ष तथा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के हीरक जयंती महोत्सव पर 75 दिवसीय आराधना के दौरान 48 वें दिन 48 दीपकों से आराधना की गई। रविवारीय कार्यक्रम में सावन-प्रमथेश जैन, अंकुरी-लवीश जैन, मीना-शांतिलाल रोकड़िया, ममता सुनील जैन, चैतन्य अवनिश पंचोलिया, रीना-अरिहंत गोठाणे, समीक्षा-महेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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