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झुमरी तिलैया जैन समाज ने दसलक्षण महापर्व के तीसरे दिन मनाया उत्तम आर्जव धर्म :  विदुषी डॉ. निर्मला सांघी ने प्रवचन में कहा – “मायाचारी छोड़ें, सरलता और ऋजुता अपनाएँ”


झुमरी तिलैया में दसलक्षण महापर्व का तीसरा दिन उत्साहपूर्वक उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर दोनों जैन मंदिरों में अभिषेक, शांति धारा, संगीतमय पूजन और तत्वार्थ सूत्र वाचन हुआ। शाम को आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में धार्मिक तंबोला का आयोजन किया गया। पढ़िए राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन की खास रिपोर्ट… 


झुमरी तिलैया। दसलक्षण महापर्व का तीसरा दिन झुमरी तिलैया जैन समाज द्वारा उत्तम आर्जव धर्म दिवस के रूप में भव्यता से मनाया गया।

डॉ. निर्मला सांघी का प्रवचन

जयपुर से पधारी विदुषी डॉ. निर्मला सांघी ने आर्जव धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा –

“धोखा, छल और मायाचारी से भरा जीवन हमें दुख की ओर ले जाता है। सच्चा सुख और शांति केवल सरलता और ऋजुता में है। हमारी आत्मा पवित्र द्रव्य है, लेकिन मोह और कषाय के कारण हम अनादिकाल से दुख भोग रहे हैं और चारों गतियों में भटक रहे हैं।”

उन्होंने श्रोताओं को संदेश दिया कि मायाचारी छोड़ें और आत्मा की निर्मलता पर ध्यान दें।

उन्होंने कहा – “जैसे मिथ्यात्व के जाने पर सम्यक दृष्टि आती है, वैसे ही मायाचारी के जाने पर सरलता आती है।” प्रवचन के दौरान उन्होंने मशहूर गीत “क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे” का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें अपनी आत्मा की असली शक्ति को पहचानना होगा और दूसरों से छल-कपट नहीं करना चाहिए।

दोनों मंदिरों में पूजन-अभिषेक

सुबह दोनों जैन मंदिरों में भक्तों ने श्रद्धा पूर्वक उत्तम आर्जव धर्म की विधान पूजा की।

• बड़ा मंदिर में मूलनायक पारसनाथ भगवान पर प्रथम अभिषेक और शांति धारा सुरेश, नरेंद्र, सिद्धार्थ, अरिहंत जैन झाझंरी परिवार ने की।

• पांडुकशीला में विहार कराकर अभिषेक सुरेंद्र-सरिता जैन काला परिवार ने किया।

• आदिनाथ भगवान की बेदी पर शांति धारा अमित आर्जव जैन छाबड़ा परिवार द्वारा संपन्न हुई।

• मुख्य शांति धारा अशोक और साकेत जैन सरावगी परिवार तथा दूसरी ओर से आर्जव जैन छाबड़ा ने की।

• नए मंदिर की भव्य प्रतिमा पर प्रथम अभिषेक और शांति धारा का सौभाग्य चुन्नीलाल, प्रदीप, पीयूष जैन छाबड़ा परिवार को मिला।

इसके बाद सुबोध-आशा जैन गंगवाल के निर्देशन में संगीतमय पूजन हुआ। दिन में तत्वार्थ सूत्र का वाचन स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री और डॉ. निर्मला दीदी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक तंबोला

शाम को दोनों मंदिरों में भव्य आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए।

धार्मिक तंबोला का आयोजन परियोजना निदेशक प्रमोद जैन पांड्या और अमित जैन सेठी (मोनी) के निर्देशन में हुआ।

पुरस्कार वितरण ओमप्रकाश हीरा मानी जैन सेठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारी, जैन महिला संगठन, जैन युवक समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।

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