आचार्य श्री सुनील सागर जी मुनिराज ससंघ का कामां पंचकल्याणक के उपरांत श्री महावीर जी होते हुए जयपुर की ओर मंगल विहार चल रहा है, जिसमें सीकरी शहर के नजदीकी गांव बेर्रू के प्राइवेट स्कूल में आचार्य श्री की बुधवार की आहारचर्या हुई। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
सीकरी। विहार के दौरान गांव बेर्रू में आचार्य श्री सुनील सागर जी मुनिराज ने एक निजी विद्यालय के बच्चों को प्रवचनों के माध्यम से जैन धर्म के बारे में विस्तार से बताया। जैन युवा परिषद् सीकरी के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र जैन ने बताया कि आचार्य श्री सुनील सागर जी मुनिराज ससंघ का कामां पंचकल्याणक के उपरांत श्री महावीर जी होते हुए जयपुर की ओर मंगल विहार चल रहा है, जिसमें सीकरी शहर के नजदीकी गांव बेर्रू के प्राइवेट स्कूल में आचार्य श्री की बुधवार की आहारचर्या हुई। इस अवसर पर स्कूल के बच्चों ने जैन संतों की आहारचर्या को देखा कि कैसे जैन संत 24 घंटे में सिर्फ एक बार आहार- जल ग्रहण करते हैं और वो भी बिना किसी बर्तन के खड़े होकर। इसके बाद स्कूल के प्रिंसिपल के विशेष निवेदन पर आचार्य श्री ने बच्चों के लिए प्रवचन भी दिए।
आचार्य श्री ने प्रवचनों के माध्यम से बच्चों से कहा कि हमेशा एक-दूसरे के सहयोगी बनकर पढ़ाई करना। अगर आपका कोई साथी गरीब है उसे अपनी पुस्तक या पेन देकर या जिस तरह से भी आप उसकी मदद कर सको वो करना। मोबाइल, बाहरी खान-पान से दूरी बनाकर रखना क्यूंकि ये दिमाग को कमजोर पढ़ाई में बाधा उत्पन्न करते हैं। उन्होंने बच्चों से कहा कि रात को जल्दी सोने के बाद प्रातः जल्दी उठकर अध्ययन करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने स्कूल के अध्यापकों व बच्चों से मांसाहार ना करने का संदेश देते हुए सभी को बहुत आशीर्वाद दिया।
इस अवसर पर कैथवाड़ा के सरकारी अध्यापक नानक चंद शर्मा ने भी आचार्य श्री के चरणों में कविताएं प्रस्तुत कर जैन धर्म का व्याख्यान किया। युवा परिषद् सीकरी के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र जैन ने स्कूल को पावन धरा बताते हुए कहा कि जब भी किसी जैन संत का यहां से विहार होता है तो स्कूल के संचालक जैन संतों के लिए दरवाजे खोल देते हैं। ये स्कूल के प्रिंसिपल, अध्यापकों व बच्चों का परम सौभाग्य है जो उनके स्कूल में जैन संतों के चरण पड़े।













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