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जैन युवा ‘नव किरण’ ग्रुप ने कराई धार्मिक यात्रा: कई प्रांतों के धर्मावलंबियों ने यात्रा में की भक्ति आराधना 


बेंगलुरु के जैन युवा ‘नव किरण’ ग्रुप की ओर से श्रवणबेलगोला और मंदार गिरि यात्रा का आयोजन किया गया। समन्वय, सदभावना के साथ बेंगलुरु के जैन धर्मावलंबियों को एकता के सूत्र में पिरोने तथा बच्चों को विद्यालय के नववर्ष के प्रारंभ में जिन दर्शन यात्रा कर संस्कार और संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य सेयात्रा में 500 धर्मानुरागियों ने भाग लिया। बेंगलुरु से पढ़िए, यह खबर…


बेंगलूरु। बेंगलुरु के जैन युवा ‘नव किरण’ ग्रुप की ओर से श्रवणबेलगोला और मंदार गिरि यात्रा का आयोजन किया गया। समन्वय, सदभावना के साथ बेंगलुरु के जैन धर्मावलंबियों को एकता के सूत्र में पिरोने तथा बच्चों को विद्यालय के नववर्ष के प्रारंभ में जिन दर्शन यात्रा कर संस्कार और संस्कृति से परिचित कराने के उद्देश्य सेयात्रा में 500 धर्मानुरागियों ने भाग लिया। प्रमुख समन्वयक अंकित जैन और सचिन सेठी ने बताया कि इसमें देश के प्रांत आसाम, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल के छात्र और युवा जो कई वर्षों से यहा रह रहे हैं और अकेला महसूस करते थे, उन्हें सबके साथ यात्रा में बहुत आनंद आया। यात्रा में एक साल के बच्चे से लेकर 80 साल के वरिष्ठ जनों ने भी भाग लिया। जिनको युवाआंे ने बड़ी आत्मीयता प्यार व सम्मान के साथ यात्रा करवाई।

श्रवणबेलगोला पहुंचने पर स्थानीय वाद्य वृंद के साथ स्वागत किया गया। विंध्यगिरि पर्वत पर स्थित विश्व के सात आश्चर्य की सूची में शामिल देश की शान, कर्नाटक का गौरव भगवान बाहुबली जी की प्रतिमा के दर्शन वंदना कर यहां के इतिहास, कला व सांस्कृतिक वैभव को देख अभिभूत हो गए। 9 बस और कई कार में आए यात्रियों ने बड़ी ही भक्ति भाव से दर्शन, अभिषेक और पूजन किया। प्राचीन चंद्रगिरि पर्वत के 14 मंदिरों के दर्शन किए। जहां भद्रबाहु जी और चंद्रगुप्त जी के चरण भी हैं। सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने यहां तपस्या कर समाधि ली थी। इसलिए इस पर्वत का नाम चंद्रगिरि पड़ा। फिर मठ के मंदिरों के दर्शन किए, जहांपर 500 साल प्राचीन भित्तिचित्र बने हुए हैं।

चंदा प्रभुजी के समक्ष भक्ति भाव से नृत्यात्मक आरती की

महेश काला द्वारा प्रायोजित स्वादिष्ट भोजन का सभी ने आनंद लिया। सुबह के नाश्ते में दक्षिण भारत के प्रसिद्ध इडली, वडा, उपमा था तो दोपहर व संध्या में राजस्थान के प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन मलाई धेवर ,रस मलाई, कलाकंद, आम रस, कचौरी, दही बड़ा आदि ने सबको खूब लुभाया और राजस्थान की याद दिला दी। अब मंदार गिरी की ओर चलें जो करीब 120 किमी की दूरी पर है। सभी ने पहले पर्वत की वंदना की, जहां समवशरण की रचना की है। यहां के प्रसिद्ध पीछी मंदिर, जिसमंे आचार्य शांति सागरजी महाराज के जीवन के कुछ प्रसंग के म्यूरल बनाए गए हैं, जो बहुत ही सुंदर हैं। खुले आसमान के नीचे स्थित चंदा प्रभुजी के समक्ष बड़ी भक्ति भाव से नृत्य करते हुए आरती की। सभी श्रद्धालु युवा भाव विभोर हो झूम उठे।

प्रायोजकों का सम्मान किया

इस अवसर पर विल्सन गार्डन समाज के अध्यक्ष अशोक सेठी ने कई प्रायोजकों का सम्मान किया। नवकिरण युवा मंच द्वारा सुनियोजित, सुव्यवस्थित शानदार धार्मिक यात्रा के आयोजन के लिए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। करीब 31 सदस्यों ने अपना कीमती समय देकर यात्रा को सफल बनाया। सभी की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए उन्होंने युवाओं को धर्म और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर बेंगलूरु और अनेक शहरो के गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी ने यात्रा की बहुत सराहना की। जैन युवा ‘नव किरण’ अंकित जैन, अरिहंत जैन, राहुल जैन, स्नेहा जैन, आदीश जैन, ईशा जैन, प्रज्वल जैन, प्रणव जैन, प्रेरणा जैन, रुचिका जैन, पार्श्व जैन, अक्षत जैन, पंकज जैन, सुचिता जैन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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