मुनि श्री 108 निर्वेग सागर महाराज, मुनिश्री 108 शीतलसागर महाराज, ऐलक श्री 105 निजानंदसागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश गुरुवार को झुमरीतिलैया की कोडरमा धर्म नगरी में हुआ। पढ़िए नवीन जैन व राज कुमार अजमेरा की रिपोर्ट…
झुमरीतिलैया। जैन धर्म के सबसे बड़े तपस्वी जिनकी चर्या तप और त्याग झलकता है ऐसे संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 निर्वेग सागर महाराज, मुनिश्री 108 शीतलसागर महाराज ऐलक श्री 105 निजानंदसागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश गुरुवार को झुमरीतिलैया की कोडरमा धर्म नगरी में हुआ।
आपको बता दें, इस भीषण गर्मी में जहां लोग धूप में निकलने के बारे में सोचते हैं। वैसे समय में जैन मुनि खाली पैर पद गया नगरी से पद विहार करते हुए राजगीर पावापुरी, नवादा होते हुए लगभग 200 किलोमीटर की पद यात्रा करते हुए यहां पहुंचे हैं। जहां शहर के मुख्य द्वार पर समाज के सभी पदाधिकारी गणों और महिला समाज के पदाधिकारी गणों ने गाजे-बाजे के साथ अगवानी की।
यह कोडरमा वालों का सौभाग्य है
गुरुदेव ससंघ नगर भ्रमण करते हुए बड़ा जैन मंदिर जी पहुंचे, जहां देवाधिदेव 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर मुनि श्री के मुखारबिंद से विश्व शांतिधारा कराई गयी। शांति धारा करने का सौभाग्य जैन अजित गंगवाल, जैन संजय गंगवाल के परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद मंगलाचरण जैन सुबोध गंगवाल ने किया और दीप प्रज्वलन समाज के पदाधिकारी गण ने किया और मुनि संघ को ग्रीष्म कालीन प्रवास के लिए श्रीफल चढ़ाया। इसके बाद मुनि श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि गर्मी की तपिश से ज्यादा जो शरीर में अंदर की तपन और त्याग को जीत लेता है, वह अपने जीवन को जीत लेता है। उन्होंने आगे कहा कि यह कोडरमा एक धर्म नगरी है, जहां बहता योगी रमता पानी कहावत के अनुसार गुरुवर जैन संत सम्मेद शिखर जाने के क्रम में यहां पर आगमन हो जाता है। यह कोडरमा वालों का बहुत सौभाग्य है। गुरुदेव के आहार सौभाग्य सुरेश-नरेंद्र झांझरी और प्रदीप-मीरा छाबड़ा के परिवार को प्राप्त हुआ।













Add Comment