हाल ही मध्यप्रदेश और राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में जैन समाज के 19 विधायक विजयी हुए हैं। जैन समाज में इस खबर से काफी उत्साह है और उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। जगह जगह चर्चाएं हो रही हैं कि समाज के इन विधायकों को जैन तीर्थों के संरक्षण और संवर्धन में अपना योगदान देना चाहिए। पढ़िये राखी जैन की विशेष रिपोर्ट….
जयपुर/ भोपाल। जैन समाज के तीर्थों पर आए दिन अतिक्रमण एवं कब्जे होने से पूरे देश में जैन समाज काफी नाराज है, ऐसे में हाल ही राजस्थान और मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में कुल 19 विधायकों की जीत से समाज में उत्साह है। जैन विधायकों से जैन समाज की बहुत सारी उम्मीदें और अपेक्षा है। इनमें सबसे प्रमुख हैं जैन धरोहर की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति विशेष ध्यान देना। आए दिन देश के किसी न किसी हिस्से से जैन तीर्थों पर अतिक्रमण और छेड़छाड़ की ख़बरें आती रहती हैं, इन सब पर रोक लगे और सरकार – प्रशासन जैन धरोहरों के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हुए ऐसी गतिविधयों पर तुरंत एक्शन ले। कुल मिलाकर जैन विधायक समाज और सरकार के बीच सेतु का काम कर सकते हैं। विधायक समाज के पक्ष को प्रशासन के सामने पुरजोर तरीके से रखें और जैन तीर्थों पर मंडरा रहे खतरे के बादल को हटाने में अपनी भूमिका निभाएं।
आत्म-निर्भरता और सामाजिक समृद्धि
जैन विधायक जैन समाज को आत्म-निर्भर बनाने के लिए उपायों को बढ़ावा दें और सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से समृद्ध बनाने में अपना योगदान दें। अहिंसा के सिद्धांतों को बढ़ावा देने और समाज को सशक्त करने के लिए उच्च नैतिक मूल्यों का समर्थन करने की भी इनसे उम्मीद की जा रही है।
गिरनार जी का मामला है चर्चा में
हजारों वर्ष के प्राचीन महाभारतकालीन श्री कृष्ण के चचेरे भाई 22वे जैन तीर्थकर नेमिनाथ के मोक्षस्थल गिरनार की पांचक उर्जयंत टोक पर जैन समाज वषों से पूजा दर्शन करता आया है लेकिन वर्ष 2004 से कुछ लोगो द्वारा जैन तीथों पर कब्जा करने की साजिश के तहत पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही से हाई कोर्ट के 17 फरवरी 2005 के आदेश की अवहेलना कर अवैध अतिक्रमण जैनों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की जा रही है।













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