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साधुओं का एकजुट होना भी जरूरी : अलग-अलग स्तर की संस्थाओं में हो सकता है एक ही व्यक्ति 


श्रीफल जैन न्यूज ने एक संस्था, एक पद, एक व्यक्ति को लेकर जो मुहिम शुरू की है, वह सराहनीय है, लेकिन इसमें एक चीज और जोड़ दें और वे हैं साधु। जब साधु एकजुट होंगे तो समाज भी एकजुट होगा।


गेस्ट राइटर

 -जंबू प्रसाद जैन, अध्यक्ष, तीर्थ क्षेत्र कमेटी

मैं एक संस्था, एक पद, एक व्यक्ति के विचार से सहमत हूं लेकिन संस्था स्थानीय स्तर पर भी होती है, राज्य स्तर पर भी होती है और राष्ट्रीय स्तर पर भी होती है। हमारी कुछ संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैं। अगर इस प्रकार के संस्थानों में एक व्यक्ति व्यक्ति अलग-अलग पद पर है तो उसमें कुछ अनुचित नहीं है। लेकिन वही व्यक्ति अगर स्थानीय स्तर की अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग पद में है, तो वह अनुचित है। श्रीफल जैन न्यूज ने इसे लेकर जो मुहिम शुरू की है, वह सराहनीय है, लेकिन इसमें एक चीज और जोड़ दें और वे हैं साधु। जब साधु एकजुट होंगे तो समाज भी एकजुट होगा। समाज जब एकजुट होगा, तब जाकर वह आगे बढ़ेगा। अभी अगर साधु ही बंटे हुए हैं, एक साधु का जो संघ है तो उस संघ में जो उनके भक्त हैं, वे उन्हीं का गुणगान करते हैं। अगर वह किसी दूसरे संघ में चले जाते हैं तो उसमें उनकी कोई वैल्यू नहीं रहती। मेरे विचार से समाज अलग-अलग टुकड़ों में बंटा है तो उसमें बहुत कुछ योगदान साधुओं का भी है। इसलिए आप साधुओं के एक होने को लेकर भी अभियान चलाएं।

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