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तीर्थंकर भगवंतों की जन्म भूमि के विकास में आर्यिका ज्ञानमतीजी की प्रेरणा: माताजी की विशेष रुचि से विश्वव्यापी ख्याति मिली इन धर्मस्थलों को- आर्यिका श्री चंदनामतीजी 


गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। यहां पर नित्य होने वाले प्रवचनों के माध्यम से माताजी के मुखारबिंद से देशना सुनकर भक्तजन धर्मलाभ उठा रहे हैं। अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…


अयोध्या। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। यहां पर नित्य होने वाले प्रवचनों के माध्यम से माताजी के मुखारबिंद से देशना सुनकर भक्तजन धर्मलाभ उठा रहे हैं। बुधवार को आर्यिका चंदनामती माताजी ने कहा कि तीर्थंकर भगवंतों की कल्याणक भूमि एवं विशेष रूप से जन्मभूमि के विकास की ओर आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की विशेष आंतरिक रुचि सदा से रही है। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का कहना है कि हमारी संस्कृति का परिचय प्रदान करने वाली ये कल्याणक भूमि हमारी संस्कृति की महान धरोहर हैं। अतः इनका संरक्षण, संवर्धन और विकास अत्यंत आवश्यक है। सर्वप्रथम भगवान शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरनाथ की जन्मभूमि हस्तिनापुर में आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से निर्मित जैन भूगोल की अद्वितीय रचना ‘जम्बूद्वीप’ आज विश्व के मानस पटल पर अंकित है।

मानव निर्मित स्वर्ग’ की संज्ञा मिली 

उत्तरप्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने जम्बूद्वीप से हस्तिनापुर की पहचान बताते हुए उसे एक अतुलनीय ‘मानव निर्मित स्वर्ग’ की संज्ञा दी है। वर्ष 1993 से 1995 तक शाश्वत जन्मभूमि अयोध्या में ‘समवशरण मंदिर’ और ‘त्रिकाल चौबीसी मंदिर’ एवं बाद के वर्षों में अयोध्या में जन्मे पांचों तीर्थंकर भगवंतों की जन्मस्थली के प्रतीक पांचों टोकों पर विशाल जिनमंदिरों का निर्माण करवाकर उसका विश्वव्यापी प्रचार किया।

यहां भी माताजी की प्रेरणा से बने भव्य मंदिर

अकलूज (महाराष्ट्र) में नवदेवता मंदिर निर्माण की प्रेरणा, सनावद (मप्र) में णमोकार धाम, प्रीत विहार-दिल्ली में कमलमंदिर, मांगीतुंगी (महाराष्ट्र) में सहस्रकूट कमल मंदिर, अहिच्छत्र में ग्यारह शिखर वाला तीस चौबीसी मंदिर और भगवान ऋषभदेव की दीक्षा एवं केवल ज्ञान कल्याणक भूमि प्रयाग (इलाहाबाद) में ‘तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली तीर्थ’ का भव्य निर्माण माताजी की ही प्रेरणा के प्रतिफल हैं।

कुंडलपुर तीर्थ विश्व भर के लिए आकर्षण का केंद्र 

भगवान महावीर स्वामी की जन्मभूमि कुंडलपुर (नालंदा-बिहार) के विकास के लिए भगवान महावीर स्वामी कीर्तिस्तंभ, भगवान महावीर की विशाल खड्गासन प्रतिमा सहित विश्वशांति महावीर मंदिर, नवग्रह शांति जिनमंदिर, त्रिकाल चौबीसी मंदिर एवं नंद्यावर्त महल आदि अनेक निर्माण आपकी प्रेरणा से इस क्षेत्र पर निर्मित हुए हैं तथा कुंडलपुर तीर्थ विश्व भर के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

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