जैन समाज की ओर से जैन आचार्य विबुद्ध सागर जी महाराज का दीक्षा दिवस उपकार दिवस के रूप में आयोजित किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए जैन समाज के लोगों ने आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित कर जगत कल्याण विश्व शांति की प्रार्थना की। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…
अम्बाह। जैन समाज की ओर से जैन आचार्य विबुद्ध सागर जी महाराज का दीक्षा दिवस उपकार दिवस के रूप में आयोजित किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए जैन समाज के लोगों ने आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित कर जगत कल्याण विश्व शांति की प्रार्थना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी प्रकाश चंद्र जैन रिठौना ने कहा कि दीक्षा दिवस एक संत का दूसरा जन्म दिवस है। धर्म ग्रंथों में 4 प्रकार के साधुओं की चर्चा की गई है, इसमें सिंहवृति से ही संयम को स्वीकार करने वाले तथा सिंहवृति से ही उसे पालन करने वाले को श्रेष्ठ साधु कहा गया है। प्रकाश चंद जैन ने कहा कि संत के दीक्षा के दिन को याद करने से हमें संसार रूपी भवसागर से पार होने की प्रेरणा मिलती है। इसलिए हम संसारी दीक्षा के दिन को याद करते हैं। वहीं साधु हमने दीक्षा क्यों धारण की, इस बात पर चिंतन करते हैं। उन्होंने कहा कि लोग घरों में जब भी कहीं जाते हैं तो वापस लौट कर घर ही आते हैं किंतु दीक्षा होने के उपरांत लौटने की बात नहीं होती। यदि लौटना ही है तो फिर जाना क्यों। जो इस रहस्य को समझ जाता है, वह आचार्य बन जाता है और इस संसार रूपी भवसागर से पार हो जाता है।

साधु धर्म का प्रतीक
कार्यक्रम में राकेश भण्डारी एवं विमल भण्डारी ने कहा कि आचार्य विबुद्ध सागर श्रेष्ठ साधु हैं। उनका जीवन धर्ममय होकर श्रमशील, साधनाशील है। सुमति चंद जैन शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैन कुल में जन्म लेने वाले, उसमें संयम स्वीकार करने वाले और अपनी साधना के द्वारा धर्मसंघ के शिरमौर बनने वाले आचार्य श्री विबुद्ध सागर जी का आज दीक्षा दिवस है। साधु धर्म का प्रतीक हैं। हमें उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण द्वारा किया गया। कुलदीप जैन ओपी जैन ने देश के महान व्यक्तियों के आचार्य श्री के बारे में कहे गए उद्गारों को उल्लेखित करते हुए आचार्य श्री के सुदीर्घ जीवन की मंगलकामनाएं कीं।
तीन प्रकार की होती है आंख
आयोजन में संत श्री ने कहा कि आंख तीन प्रकार की होती है। चमड़े की, बुद्धि की और हृदय की। चमड़े की आंख खुलती है, तब उठना कहते हैं। बुद्धि की आंख खुलती है, तब समझना कहते हैं और हृदय की आंख खुलती है, तब जगना कहते हैं। इसी तरह मानव की जब हृदय की आंख खुलती है, तब वह दीक्षा लेता है और आत्म कल्याण के मार्ग पर चलता है। इस अवसर पर संत श्री की सामूहिक आरती भी की गई।













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