श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन गांधियों के मंदिर सागवाड़ा में सकल दिगम्बर जैन समाज के संयोजन में शशिकांत हुक्मीचंद बोबडा परिवार की ओर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ‘विरल’ के तत्वावधान में 8 दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान हो रहा है। शांतिनाथ भगवान और सिद्धचक्र यंत्र का अभिषेक किया गया। विश्व शांति कामनार्थ मूलनायक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर चंद्रप्रभा केसरीमल शाह ने शांतिधारा की। विधान मंडप पर अष्ट द्रव्य श्रीफल युक्त 512 अर्घ्य समर्पित किए गए। सागवाड़ा से पढ़िए, यह खबर…
सागवाड़ा। नगर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन गांधियों के मंदिर में सकल दिगम्बर जैन समाज के संयोजन में शशिकांत हुक्मीचंद बोबडा परिवार की ओर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ‘विरल’ के तत्वावधान में 8 दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन शुक्रवारको प्रातः सौधर्म इंद्र शशिकांत रुची बोबडा परिवार ने शांतिनाथ भगवान और सिद्धचक्र यंत्र का अभिषेक किया गया। साथ ही विश्व शांति कामनार्थ मूलनायक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर चंद्रप्रभा केसरीमल शाह ने शांतिधारा की। कांतिलाल बोबडा ने श्रीफल फट् किया। नवदेवता पूजा, शीतलनाथ भगवान की पूजा के बाद शुक्रवार को सिद्धचक्र विधान की पूजा के तहत इंद्र इंद्राणी समूह द्वारा विधान मंडप पर अष्ट द्रव्य श्रीफल युक्त 512 अर्घ्य समर्पित किए गए। सांयकाल कीर्तिकुमार प्रकाश कोठारी परिवार पुनर्वास कॉलोनी द्वारा आरती उतारी गई।
कार्यक्रम में यह रहे उपस्थित
इस अवसर पर सेठ महेश नोगमिया, पवनकुमार गोवाडिया, अमित गोवाडिया, खुशपाल बोबडा, राजेंद्र दोसी, भावेश गांधी, कमल संघवी, प्रेरणा शाह, नैना सारागिया, सरोज गोवाडिया, विमला दोसी, मेघा गोवाडिया, पूजा पगारिया, दिया गोवाडिया समेत चीतरी, ठाकरडा, मांडव, भीलूडा, अरथूना, आजना सहित अनेक गांव के श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विधान की पूर्णाहूति रविवार को
विधान महोत्सव के अंतिम दिन रविवार 25 मई को प्रातः जिनेन्द्र भगवान के अभिषेक के बाद नवदेवता पूजा, सरस्वती पूजा के बाद सर्व शांति महायज्ञ के तहत तीर्थंकर, कैवली तथा गणधर हवन कुंड में जैन आगम में वर्णित विविध मंत्रोच्चारण के साथ इंद्र इंद्राणी समूह द्वारा दंशाग धूप घी की आहूति के साथ श्रीफल की पूर्णाहुति की जाएगी। पुण्याहवाचन, आरती व विसर्जन विधि होगी। इसके बाद शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा को रजत गंधकुटी में विराजित कर बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो कंसारा चौक, पारसनाथ चौक, मांडवी चौक होते हुए पुनः मंदिर पहुंचेगी। जहा प्रतिमा को पुनः गर्भगृह मंे वेदी पर विराजमान करने के साथ विधान होगा।













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