नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है और उनके प्रवचनों से स्थानीय समाजजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहां प्रवचन में मुनि महाराज जीवन के गहन रहस्यों से गुरु भक्तों को अवगत करवा कर धर्म देशना दे रहे हैं। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…
नांद्रे। नगर के भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिराजों का चातुर्मास जारी है और उनके प्रवचनों से स्थानीय समाजजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहां प्रवचन में मुनि महाराज जीवन के गहन रहस्यों से गुरु भक्तों को अवगत करवा कर धर्म देशना दे रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लकश्री श्रुतसागर जी महाराज यहां विराजित हैं। मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन का मूल है प्रेम, प्रीति, स्नेह, वात्सल्य। जिसके जीवन में प्रीति का अभाव हो गया है वह मानव कितने भी प्रयास करे वह कभी संबंध नहीं बना सकता है।
संबंध का मूल है तो वह प्रीति है। जहां प्रीति है वहां संबंध है। जहां संबंध है वहां प्रीति है। जितनी प्रीति है। उतना ही संबंध है। प्रीति में अपनापन होता है एक-दूसरे की भावनाओं को समझने की शक्ति प्राप्त होती है। प्रीति है तो लोग आपका सहयोग करेंगे और नही है तो आपके संकटों में सहारा कोई नहीं, आप स्वयं ही होंगे। जब भी प्रीति करें तो वर्तमान से करें। यदि भूत से प्रीति करते हो तो हाथ में कुछ भी लगने वाला नहीं है। वर्तमान भी खराब हो जाएगा। साथ में भविष्य भी खराब होगा।













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