आचार्य विपणत सागर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जहां भी धर्म कार्य करने का मौका मिले उसे छोड़ना नहीं चाहिए, आप बहुत सौभाग्यशाली है जो आपको पुण्य प्राप्त करने का मौका मिला है नहीं तो अनेक लोग अनुकूलता होने पर भी धर्म कार्य में रुचि नहीं ले पाते। ऊन से पढ़िए, सन्मति जैन की यह खबर…
धामनोद। आचार्य विपणत सागर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जहां भी धर्म कार्य करने का मौका मिले उसे छोड़ना नहीं चाहिए, आप बहुत सौभाग्यशाली है जो आपको पुण्य प्राप्त करने का मौका मिला है नहीं तो अनेक लोग अनुकूलता होने पर भी धर्म कार्य में रुचि नहीं ले पाते। अरिहंत कीर्ति भट्ठारक पट्टाचार्य महास्वामी ने कहा कि भगवान से अलग होने पर इस शरीर का कोई महत्व नहीं रह जाता। जिन आंखों से संत या भगवान के दर्शन नहीं होते वे नेत्र मयूर पंख वाली आंखें मात्र है जो मस्तक कभी संत या भगवान के समक्ष नहीं झुकता वह कड़वे तुंबे के समान है। जिस जीभ द्वारा कभी भगवान का नाम नहीं लिया जाता वह जीभ मेंढक की जीभ के समान है।

नव देवता मंडल विधान हुआ
पवागिरी ऊन के ट्रस्टी संजय बडूद, मनीष दोषी व दीपक प्रधान ने बताया कि 7 मार्च को प्रतिष्ठाचार्य पंडित धर्म चंद्र शास्त्री दिल्ली के निर्देशन में सुबह नित्य अभिषेक पूजन के पश्चात नव देवता मंडल विधान का आयोजन अत्यंत भक्ति भाव से संगीतमय वातावरण में प्रारंभ हुआ। शाम तक चले विधान पूजन में श्रद्धालुओं ने अत्यंत भक्ति भाव से भगवान की भक्ति आराधना की। दूसरी और नवनिर्मित सहस्त्रकूट जिनालय में शनिवार को भी दिनभर रत्नमय प्रतिमाओं के विराजमान होने का कार्य दिनभर चलता रहा।
बाल ब्रह्मचारी अक्षय भैया जी पंडित नितिन जी झंझरी के निर्देशन में मंत्रोच्चार के माध्यम से श्रद्धालुओं ने प्रतिमाएं विराजमान की। साथ ही आचार्य श्री विपणत सागर जी ने जैन धर्म की सबसे कठिन चर्या केशलोच को किया । केशलोच क्रिया के अंतर्गत सभी के समक्ष आचार्य श्री ने अपने दाढ़ी एवं सर के बालों को अपने हाथ से उखाड़ा । शाम को आरती भक्ति शास्त्र प्रवचन के पश्चात विशाल कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें शहनाज हिंदुस्तानी जयपुर, कवि जैन विद्रोही ललितपुर आदि करीब 6 कवियों ने हास्य कविताओं के माध्यम से श्रद्धालुओं का खूब मनोरंजन किया।
दिल्ली की नृत्य नाटिका को सराहा
शुक्रवार रात्रि में आयोजित मयूर जैन दिल्ली द्वारा आयोजित नृत्य नाटिका के अंतर्गत पावागिरी ऊन के इतिहास पर सुंदर नाटिका एवं सती चेलना रानी के मिथ्यत्व पर आयोजित नृत्य नाटिका सुंदर प्रस्तुति ने सभी का मन मोहन लिया। मिमिक्री कलाकार मयूर जैन ने विभिन्न पात्रों की अलग-अलग आवाज को सभी के समक्ष प्रस्तुत किया।
रविवार को होगा मस्तकाभिषेक
महोत्सव के अंतिम दिन रंग पंचमी के दिन सुबह नित्य अभिषेक पूजन, मंगलाचरण चित्र अनावरण ,दीप प्रज्वलन, महाराज श्री की मंगल देशना, अतिथियों का सम्मान के पश्चात श्री जी की शोभायात्रा बैंड बाजा के साथ निकलेगी पश्चात पहाड़ मंदिर पर शांतिनाथ कुंथुनाथ अरहनाथ एवं महावीर स्वामी एवं स्वर्ण भद्रदि चार महामुनिराज की प्रतिमाओं पर महा मस्तकाभिषेक सम्पन्न होगा एवं सहस्त्रकूट जिनालय में शेष बची हुई समस्त प्रतिमाओं को विराजमान किया जाएगा।













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