परम पूज्य पवित्रवती माताजी के सानिध्य में आज प्रातः 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शांति धारा अभिषेक का आयोजन किया गया। अभिषेक के पश्चात, चातुर्मास पंडाल में जैन पाठशाला के छात्रों द्वारा सामूहिक रूप से बड़े भक्ति भाव से पूजन किया गया। पूजन के बाद, माताजी का मंगल आगमन हुआ। पढ़िए सुरेश चंद्र गांधी की रिपोर्ट…
नौगामा। परम पूज्य पवित्रवती माताजी के सानिध्य में आज प्रातः 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शांति धारा अभिषेक का आयोजन किया गया। अभिषेक के पश्चात, चातुर्मास पंडाल में जैन पाठशाला के छात्रों द्वारा सामूहिक रूप से बड़े भक्ति भाव से पूजन किया गया। पूजन के बाद, माताजी का मंगल आगमन हुआ। रविवार होने के कारण, हार्ड पिपलिया, घाटोल, बागीदौरा, इंदौर से पधारे दर्शनार्थियों का श्री समाज चातुर्मास कमेटी द्वारा पगड़ी पहनाकर, तिलक लगाकर और दुपट्टा उड़ाकर सम्मान किया गया। सम्मान के बाद, रेखा जैन और विजेंद्र नानावटी ने मृदुल स्वर में मंगलाचरण किया। मंगलाचरण के बाद, पवित्रवती माताजी ने मंगल प्रवचन दिया।
प्रवचन में माताजी ने कहा, “मनुष्य पर्याय बड़ी मुश्किल से मिलती है। बहुत अच्छे कर्म किए हैं तभी मनुष्य पर्याय प्राप्त हुई है, और मनुष्य अवतार पुनः कब मिलेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। 84 लाख योनियों में भटकने के बाद यह मनुष्य अवतार मिला है, इसलिए कुछ अच्छा करके जाओ।” उन्होंने दान की महिमा बताते हुए कहा कि “दान ऐसा होना चाहिए कि एक हाथ से दिया गया दूसरे हाथ को पता न लगे।”
प्रवचन के बाद, विशाल सागर जी महाराज के परिजनों का चातुर्मास कमेटी द्वारा स्वागत किया गया, और जैन पाठशाला के छात्रों को पुरस्कार वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन दीपक पंचोली द्वारा किया गया। शाम को मंदिर में 48 दीप विधान के तहत 48 दीप प्रज्वलित किए गए।













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