भोपाल (अवधपुरी) में जैन धर्म संघ पुणे से आए युवाओं ने मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज से शंकाओं का समाधान किया। उड़ीसा और अन्य क्षेत्रों में जैन धर्म के ऐतिहासिक विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म का उद्देश्य शांति है और तत्वज्ञान से विश्व में अशांति दूर की जा सकती है। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…
भोपाल (अवधपुरी) में जैन धर्म संघ पुणे से बड़ी संख्या में युवक एवं युवतियां पधारीं और मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज से अपने शंकाओं का समाधान किया। मुनि श्री ने जैन धर्म के इतिहास और विखंडन के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि संकीर्ण मानसिकता और नकारात्मक सोच पहले भी बाधक रही है और आज भी है। यदि हम सकारात्मक सोच और सावधानी के साथ आगे बढ़ें, तो हम विखंडन को रोक सकते हैं। उन्होंने आचार्य श्री विद्यासागरजी का मंत्र “केंची नहीं सुई बनो” साझा करते हुए समझाया कि किसी को जोड़ना कठिन है लेकिन यह ज्यादा मूल्यवान है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहना आवश्यक है।
मुनि श्री ने जैन युवा संघ के कार्यकर्ताओं की प्रशंसा की और उनके समर्पण को सराहा। उन्होंने उड़ीसा में जैन संस्कृति और तीर्थंकर मूर्तियों पर शोध के महत्व को उजागर किया। जैन धर्म के विस्तार के इतिहास और विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों पर भी प्रकाश डाला।मुनि श्री ने कहा कि जैन धर्म का उद्देश्य शांति है और हम अपने तत्वज्ञान के माध्यम से विश्व में अशांति को दूर करने में योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन मुनि श्री संधान सागर महाराज ने किया।













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