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मै तो निरा बांस था गुरुदेव ने बांसुरी बना दिया: गुरु उपकार दिवस मंगलमय वातावरण में मनाया


मुनि श्री अरह सागर जी महाराज श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर तलवंडी में विराजमान है। मुनि श्री के मुख से जिनाभिषेक, शांति धारा हो रही है। मंगलवार को मुनि श्री का 27 वां दीक्षा दिवस समाज में धूमधाम से मनाया गया। कोटा से पढ़िए यह खबर…


कोटा (राज.)। शिक्षण के लिए संपूर्ण भारत वर्ष में विख्यात कोटा में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री अरह सागर जी महाराज श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर तलवंडी में विराजमान है। मुनि श्री के सानिध्य में तलवंडी समाज में धर्म की महती प्रभावना हो रही है। दैनिक धार्मिक कार्यक्रमों में मुनि श्री के मुख से जिनाभिषेक, शांति धारा हो रही है। तत्पश्चात मुनि श्री के प्रवचन व संध्या काल में शंका समाधान एवं आचार्य भक्ति तथा संगीतमय आरती नित्य प्रतिदिन भक्तों द्वारा श्रद्धा भक्ति और समर्पण के साथ आयोजित की जा रही है। तलवंडी के प्रचार प्रसार मंत्री राजकुमार ने बताया कि 22 अप्रैल को मुनि श्री का 27 वां दीक्षा दिवस समाज में धूमधाम से मनाया गया। आज ही के दिन पूज्य मुनिश्री ने 27 वर्ष पूर्व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से गृहस्थ जीवन त्याग कर संसार शरीर ओर भोगो के मार्ग को छोड़कर संयम के व्रत आदि ग्रहण कर मुनि पद को स्वीकार किया था। आज के दिन तलवंडी समाज में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की संगीतमय सामूहिक पूजन एवं मुनिश्री के समक्ष गुणानुवाद अर्घ समर्पित किए गए। समाज जनों द्वारा दीप प्रज्वलन चित्र अनावरण एवं शास्त्र भेंट आदि कार्यक्रम संपन्न किये गये। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार ने बताया कि इस अवसर पर जेके जैन, सुरेश हरसोरा, अशोक पहाड़िया, प्रकाश सांमरिया, अजय जैन, उपेंद्र जैन सहित महिला मंडल उपस्थित रहे

कल्याण के मार्ग की ओर प्रशस्त करना चाहिए

मुनिश्री अरहर सागर जी ने कहा कि 27 वर्ष पूर्व यह मेरा परम सौभाग्य रहा कि मुझे आचार्य विद्यासागर जी महाराज का आशीर्वाद मिला और उन्होंने मेरे जीवन को सही दिशा प्रदान की। मैं तो निरा बांस था मुझे गुरुदेव ने बांसुरी बना दिया। मैं अनगढ़ पत्थर था। गुरुदेव ने मुझे पूजनीय बना दिया। मेरे परिवार के संस्कार इस प्रकार के थे कि मैं शुरू से ही गुरुजनों के संपर्क में रहा। उनके सानिध्य में मुझे संयम का मार्ग ग्रहण करने की प्रेरणा मिली। सभी को आशीर्वाद देते हुए मुनिश्री ने कहा कि आपको भी अपने जीवन में मोह माया का त्याग कर स्वयं को कल्याण के मार्ग की ओर प्रशस्त करना चाहिए।

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