समाचार

जीवन को जीवंत कर देते है गुरु : गुरु पूर्णिमा पर विशेष, गुरु महिमा का बखान


गुरु अनंत हैं। उनकी महिमा अनंत है। गुरु की महिमा के गुणगान और उनके उपकार को स्मरण करने का पावन अवसर प्रदान करती है। गुरु पूर्णिमा पर पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह विशेष प्रस्तुति…


कोटा। भारतीय संस्कृति और उसके मूल्यों में गुरु का महत्वपूर्ण स्थान है। गुरु का अर्थ यदि देखा जाए तो “गु”अर्थात अंधकार “रु” अर्थात प्रकाश जो अंधकार से प्रकाश की ओर, नर से नारायण, तीतर से तीर्थंकर फर्श से अर्श की यात्रा करवा दें। वहीं सच्चा गुरु कहलाता है। गुरु दो तरह के होते हैं। एक लौकिक गुरु दूसरे आध्यात्मिक गुरु। मैंने एक भजन लिखा है। उसके बोल है- ‘जिनके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं गुरु जीवन में यदि गुरु मिल जाए समझो जीवन सवर जाए गुरु ही जीवन में सद रहा दिखाए रे’। जैसा कि संत कबीरदास ने कहा गया है कि ‘गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागू पाए बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए’। इसका अर्थ होता है गुरु ही भगवान की पहचान करवा सकता है। गुरु पूर्णिमा का अर्थ है ‘गुरु का दिन’ या ‘गुरु की पूर्णिमा’। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को दर्शाता है, जो भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है।

माता पिता भी गुरु की ही श्रेणी में आते हैं

गुरु जीवन को जीवंत कर देते है, जो ज्ञान और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। गुरु इस दिन विशेष रूप से पूजनीय वंदनीय है। गुरु की महिमा गरिमा को शब्दों में नहीं लिखा जा सकता, वो अटूट एवं विराट होती है। यदि इस धरती के सभी जलाशय को स्याही बना ली जाए और जितने भी पेड़ पौधे वन-उपवन हैं उनको कलम बना लिया जाए तब भी गुरु की महिमा गरिमा को नहीं लिख पाएंगे। माता पिता भी गुरु की ही श्रेणी में आते हैं। उनका उपकार कभी नहीं चुकाया जा सकता है। मानव इस संसार में चौरासी लाख गतियों में भ्रमण करके दुर्लभ चिंता मणि रत्न के समान मानव पर्याय यह जीवन प्राप्त करता है। नियति और प्रकृति जो देती है वो हो लेती है। जैसी करनी वैसी भरनी वाला सिद्धांत लागू है। जीवन में सबसे बचा जा सकता है परंतु अपने कर्मों से नहीं। कर्म किसी को नहीं छोड़ता है। अपने जीवन ने एक सदगुरु अवश्य बनाएं, जो जीवन को जीवंत कर दे।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

You cannot copy content of this page