आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 36 साधुओं सहित नीमच से विहार कर 7 मई को जावद नगर में मंगल प्रवेश किया। सकल जैन समाज ने अगवानी की। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर आरती की गई। उन्होंने यहां धर्मसभा को संबोधित किया। जावद से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर…
जावद। जिन्होंने संसार को जीत लिया, जिन्होंने मोह, राग़,द्वेष को जीत लिया वही जिन कहलाता है। नगर प्रवेश में अनेक दुकानों के नाम पर प्रवचन को केंद्रित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि भगवान के दर्शन आस्था से करना चाहिए। भगवान के जिनालय आस्था का संदेश देते हैं। चारों कषाय क्रोध, मान, माया लोभ और पांचों इंद्रियों के विषयों से दूर रहना चाहिए। यह उद्गार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने मंगल प्रवेश के दौरान धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संत हमें भगवान के स्वरूप का दर्शन कराते हैं और भगवान बनने की प्रेरणा देते हैं। संसार रूपी समुद्र को कैसे पार किया जा सकता है। इसका गुरु ज्ञान कराते हैं। आचार्य श्री ने आगे कथा के माध्यम से बताया कि एक कमंडल में छिद्र था तो वह पानी में डूब गया। दूसरा कमंडल में छिद्र नहीं था इसलिए वह पानी में तैरता रहा। इसी प्रकार संसार रूपी समुद्र में, नदी में व्यक्ति विषय, रागद्वेष रूपी छिंद्र से संसार में डूब रहा है। संसार में परिभ्रमण कर रहा है। हर संसारी प्राणी में अनंत शक्ति है 24 तीर्थंकरों ने धर्म का संदेश दिया है । भगवान महावीर स्वामी ने भी जियो और जीने दो का संदेश दिया है।
व्यक्ति अपने स्वरूप को भूल रहा
आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने संसार में सुखी रहने का सूत्र बताए। उसके लिए व्यक्ति को शरीर और आत्मा का भेद समझना जरूरी है। जिनालय में स्थित भगवान वीतरागता का संदेश देते हैं। व्यक्ति अपनी शक्ति,अपने स्वरूप को भूल रहा है। जब उन्हें अपने शक्ति का बोध होता तो हम सब प्राणी में सिद्ध बनने की क्षमता है।
श्री जिनेंद्र जैन जावद ने बताया कि धर्मसभा के पूर्व
प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का विहार मध्यप्रदेश से राजस्थान की ओर चल रहा है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 36 साधुओं सहित नीमच से विहार कर 7 मई को जावद नगर में मंगल प्रवेश किया। सकल जैन समाज ने अगवानी की। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर आरती की गई। आचार्य श्री का इस नगर में दूसरी बार मंगल प्रवेश हुआ। इसके पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ आपका मुनि अवस्था में आगमन हुआ था। प्रतिदिन मध्यप्रदेश, राजस्थान के अनेक नगरों से भक्त आचार्य संघ के दर्शन कर नगर पधारने का निवेदन कर रहे हैं।













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