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गुलाबी नगरी में शिखरजी के लिए उमड़ा जनसैलाब: चार किलोमीटर लंबा मौन जुलूस, अनुशासित विरोध प्रदर्शन की मिसाल

जयपुर. मनीष गोधा – जैन धर्म के सर्वोच्च सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी को पर्यटन स्थल घोषित करने के विरोध में एवं पवित्र तीर्थ स्थल घोषित करने की मांग को लेकर पूरे देश में चल रहे अहिंसात्मक आंदोलन की कड़ी में भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी एवं जैन श्वेताम्बर सोसायटी के निर्देशन में जयपुर सहित पूरे राजस्थान में सकल जैन समाज (दिगंबर और श्वेतांबर) के बैनर तले विशाल मौन जुलूस निकाले गए।

जुलूस के समापन पर जैन संतों के सानिध्य में धर्म सभा हुई तत्पश्चात विरोध स्वरूप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री,झारखंड सरकार के मुख्य मंत्री ,सासंद,आदि के नाम से उच्चाधिकारियों को ज्ञापन दिये गये।

जयपुर में अग्रवाल कालेज से महावीर स्कूल तक निकले मौन जुलूस में जन सैलाब उमड़ पड़ा। बच्चों से लेकर वृद्धजनों तक सभी सम्मेद शिखर बचाओ की भावना से शामिल हुए।

जुलूस में भीड का अन्दाजा इससे लगाया जा सकता है कि जुलूस का पहला छोर महावीर स्कूल पहुंच गया था तब अन्तिम छोर त्रिपोलिया बाजार में था। इसके अलावा सैकड़ों जैन बन्धु पहले से ही सीधे महावीर स्कूल पहुंच गए।

जयपुर सहित 60 स्थानों पर निकले जुलूस
दिगम्बर जैन समाज के राज कुमार कोठ्यारी एवं सुभाष चन्द जैन तथा श्वेताम्बर जैन समाज के राज कुमार बरडिया एवं महेन्द्र सिंघवी ने बताया कि सम्मेद शिखर जैन तीर्थ जो समाज की आस्था का मुख्य केंद्र है को पर्यटक स्थल (पिकनिक स्पॉट) घोषित करने तथा अध्यादेश जारी करने पर सकल जैन समाज का विरोध स्वरूप मौन जुलूस रविवार 25 दिसंबर को राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर में लगभग 60 स्थानों पर निकाला गया।

समाज के प्रतिनिधियों ने अपने सभी तरह के प्रतिष्ठान बंद रखकर अपना विरोध जताया।

जयपुर में उमड़ा जन सैलाब
आगरा रोड स्थित अग्रवाल कालेज पर से मौन जुलूस प्रातः 9.00 बजे प्रारंभ हुआ जो जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, किशनपोल बाजार, अजमेरी गेट, एमआई रोड़ , महावीर मार्ग होते हुए सी-स्कीम स्थित महावीर स्कूल में जाकर धर्म सभा में परिवर्तित हो गया ।

जुलूस में पुरुष वर्ग सफेद वस्त्र तथा महिला वर्ग -केसरिया साड़ी या केसरिया वस्त्र धारण कर , विरोध स्वरूप काली पट्टी बांध कर तथा मास्क लगाकर शामिल हुए । जुलूस में सम्मेद शिखर बचाओ से सम्बंधित नारे सम्मेद शिखर हमारा है । प्राणों से भी प्यारा है ।।

सम्मेद शिखर को पवित्र तीर्थ घोषित करने की मांग सहित कई कोटेशन लिखी तख्तियां व जैन ध्वज लेकर जैन बन्धु शामिल हुए। जुलूस की व्यवस्था श्री वीर सेवक मण्डल के कार्यकर्ता ने देखी।

जुलूस के शुरु में अग्रवाल कालेज में मनीष चौधरी ने मंगलाष्टक उच्चारित किया तथा समन्वय समिति सदस्यों के केसर का तिलक लगाया। गणिवर्य मेहुल सागर महाराज ने मंगल पाठ सुनाकर जुलूस के सफल होने का आशीर्वाद प्रदान किया।

महावीर स्कूल में विशाल धर्मसभा
धर्म सभा में दिगम्बर जैनाचार्य सुनील सागर महाराज, आचार्य शशांक सागर महाराज तथा श्वेताम्बर जैन संत गणिवर्य श्री मेहुल प्रभ सागर महाराज ,प्रवर्तिनि शशिप्रभा श्री, वैराग्य निधि श्री के मंगल प्रवचन हुए।

सभी ने एकमत से कहा कि जैन समाज का प्राण है सम्मेद शिखर,हमारी आत्मा है, हमारा दिल है।इसे कभी भी अपवित्र नहीं होने देंगे।इसकी पवित्रता की मर्यादा बनाए रखने के लिए अपने प्राण भी न्यौछावर कर देंगे। इसे कभी भी पर्यटन स्थल नहीं बनने देंगे ।

तीर्थों की पवित्रता बनी रहे – आचार्य श्री सुनील सागर जी
आचार्य श्री सुनील सागर जी ने कहा कि तीर्थो की प्राचीनता,निर्मलता, पवित्रता बनी रहनी चाहिए । सरकार को जनता की भावना के अनुरूप विकास कार्य करने चाहिए । भगवान महावीर की दो आंखें हैं, दिगम्बर और श्वेताम्बर ।

दोनों समुदाय आज की तरह तीर्थों की रक्षा के लिए हमेशा एकजूट होकर विरोध करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी । आचार्य श्री शशांक सागर महाराज ने जोशीला उदबोधन देते हुए कहा कि सम्मेद शिखर पर वार सहन नहीं होगा । हम अहिंसावादी है, हमें शांति से रहने दो, हमें क्रांति में आने को मजबूर ना करो अन्यथा पूरे देश में भूचाल आ जाएगा ।

श्वेताम्बर संत गणिवर्य मेहुल सागर महाराज ने कहा कि तीर्थ स्थान पर जाकर पापों को नष्ट करते हैं, सोचिए यदि वो तीर्थ क्षेत्र पर्यटन स्थल बन जाएगा तो हम आत्मा के उद्धार के लिए कहां जाएंगे। जैन समाज संस्कारों की पाठशाला चलाता है,जन जन के उत्थान में अग्रणी रहता है, ऐसे सेवाभावी समाज के तीर्थ को पवित्र रखना चाहिए।

प्रवर्तिनि साध्वी शशि प्रभा ने कहा- कि 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि है सम्मेद शिखर। यहां से हमें ऊर्जा मिलती है।यह सामान्य भूमि नहीं है।इस मोक्षगामी भूमि के लिए हमें कुछ भी चुनौती देनी पड़े, हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। तीर्थों की रक्षा के लिए प्राणों की आहूति भी कम है।

साध्वी वैराग्य निधि ने कहा- कि सम्मेद शिखर तीर्थाधीराज है, जैन जगत का प्राण है।इस पावन तीर्थ की रक्षा जरुरी है। उन्होंने जैन शब्द की परिभाषा बताते हुए कहा कि जैन पूरे विश्व में सबसे ज्यादा सेवा कार्य करते हैं तथा देश की इकोनोमी में सबसे ज्यादा अपना योगदान देते हैं। सम्मेद शिखर को आमोद प्रमोद का वातावरण नहीं चाहिए।इसे पवित्र तीर्थ क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए।

इससे पूर्व धर्म सभा में संत सुधा सागर महाविद्यालय की छात्राओं तथा सुभाष बज ने मंगलाचरण किया ।
राजस्थान जैन सभा के अध्यक्ष सुभाष चन्द जैन ने स्वागत उदबोधन देते हुए सम्मेद शिखर बचाओ आंदोलन की पृष्ठ भूमि पर प्रकाश डाला तथा मौन जुलूस के सहयोगियों का आभार व्यक्त किया । मंच संचालन मनीष बैद एवं विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने किया ।

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