ऋषभ विहार दिल्ली के श्री सन्मति समवशरण धर्म सभा मंडप में श्री दिगंबर जैन गोलापूर्व समाज दिल्ली (रजि.) द्वारा संयोजित नैमित्तक राष्ट्रीय अधिवेशन राष्ट्रसंत, चतुर्थ पट्टाचार्य, प्राकृताचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज (ससंघ 51 पिच्छी) के मंगल सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री सुनील सागर ने कहा कि ना देह की पूजा होती है, ना रंग की, ना जाति की, ना कुल की पूजा होती है, पूजा होती है गुणों की। गुण नहीं है तो वह ना श्रावक है और ना श्रवण है। पढ़िए रत्नेश जैन रागी बकस्वाहा की रिपोर्ट…
नई दिल्ली। ऋषभ विहार दिल्ली के श्री सन्मति समवशरण धर्म सभा मंडप में श्री दिगंबर जैन गोलापूर्व समाज दिल्ली (रजि.) द्वारा संयोजित नैमित्तक राष्ट्रीय अधिवेशन राष्ट्रसंत, चतुर्थ पट्टाचार्य, प्राकृताचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज (ससंघ 51 पिच्छी) के मंगल सानिध्य में संपन्न हुआ।
लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाएं
इस विशाल सभा मंडप में आयोजित गरिमामय समारोह में जैन समाज के गौरवमय इतिहास की जानकारी पर प्रकाश डालते हुए तथा समाज को जागृत करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि ना देह की पूजा होती है, ना रंग की, ना जाति की, ना कुल की पूजा होती है, पूजा होती है गुणों की। गुण नहीं है तो वह ना श्रावक है और ना श्रवण है। निश्चित ही आपके पुरखों ने वैसा जीवन जिया है, जिसे आप गौरव से कह पा रहे हैं कि हम जैन हैं। जिस जाति गोत्र में हमारे गौरव जन्मे हैं, जिसमें देश भक्त क्रांतिकारी जन्मे हैं, जिसमें विद्वान और मुनिराज आदि जन्मे हैं, गौरव होता है। लेकिन ध्यान रहे आचार- विचार आपका पिछड़ गया तो आप यह कहने के लायक नहीं रह पाएंगे। अपने आचार -विचार संभालिए, अगली पीढ़ियों का मार्गदर्शन कीजिए क्योंकि आगे की पीढ़ियां जैन धर्म की सीढ़ियां बनेंगी। आचार्य श्री ने कहा कि अहिंसा, करुणा, दया, क्षमा की मशाल जैन श्रावक और श्रमण लेकर पूरे देश व दुनिया को रास्ता दिखाता है। सभी समिति, संस्था, संगठन ऐसा काम करें कि आम लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठे और जो पिछड़ रहे हैं उनको ऊंचा उठाएं, परस्पर सहयोग देकर आगे बढ़ाएं।
ये रहे मौजूद
इस अधिवेशन की अध्यक्षता कर रहे एलएनटी सीमेंट एशिया हेड, डायरेक्टर टेक्निकल विमल कुमार जैन गुरुग्राम तथा विशिष्ट अतिथि देवेंद्र लुहारी सागर, राजेश जैन रागी बकस्वाहा, डॉ. अजित शास्त्री गुरुजी रायपुर, प्राचार्य सुरेंद्र जैन भगवां, गणतंत्र जैन आगरा, संजय शास्त्री सागर सहित अन्य अतिथियों ने पूज्य आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित किया। चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन तथा शास्त्र समर्पित कर सौभाग्य प्राप्त किया। इस मौके पर मुकेश विनम्र गुरुग्राम व महिला मंडल ने मंगलाचरण किया। डॉ. कमलेश जैन “बसंत” अलवर ने सफल संचालन कर अपनी कविताओं के माध्यम से विचार रखे और ओजस्वी वक्ताओं व अतिथियों ने जैन समाज के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक उत्थान हेतु तथा वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में उच्च भूमिका सुनिश्चित करने हेतु तथा जैन तीर्थ क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अपने विचार व्यक्त किए और गिरनार के लिए शंखनाद किया। संजय जैन (विश्व जैन संगठन) ने भगवान नेमीनाथ की पवित्र निर्वाण भूमि जैन तीर्थ क्षेत्र गिरनार के इतिहास महत्व और कथित द्वारा जबरन कब्जा कर अप्रिय घटनाओं को उतारु होने, न्यायालीन प्रक्रिया के संबंध में जानकारी देते हुए मांग के बिन्दुओं और रणनीति को बता कर सभी देशवासियों से सहयोग की अपील कर गिरनार पर शंखनाद किया। साथ ही श्री दि. जैन गोलापूर्व समाज दिल्ली के अध्यक्ष मदन जैन ‘ मनु ‘ , महामंत्री इंजी. सुधीर जैन , कोषाध्यक्ष विवेक जैन , संगठन मंत्री संदीप जैन , मीडिया प्रभारी नीरज जैन , कार्याध्यक्ष प्रमोद जैन ने संस्था की गतिविधियों को बताते हुए अपने विचार व्यक्त किये एवं ” श्री सन्मति सागर श्री सुनील सागर सहायता फण्ड योजना ” की घोषणा करते हुए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को जैन समाज के लिए किये गये बहूमूल्य योगदान हेतु शाल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शास्त्र व अन्य उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। अधिवेशन में सम्मिलित सभी अतिथियों को फाइल किट वितरण रजत जैन मेघा फाइल व अनिल जैन अंकिता फाइल के सौजन्य से भेंट करने, पी टी विमल जैन के संयोजन व कोडिनेट तथा सम्पूर्ण कार्यकारिणी के सहयोग की सराहना सभी ने की।













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