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लोभ ही पाप का बाप है-मुनि श्री गुरुदत्त सागर : मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को लोभ का त्याग करने का उपदेश 


श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्तसागरजी महाराज ने बुधवार को धर्मसभा में कहा कि लोभ ही पाप का बाप है। लोभ यानी लालच, जो इंसान को गलत राह पर ले जाता है। महरौनी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…


महरौनी। श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्तसागरजी महाराज ने बुधवार को धर्मसभा में कहा कि लोभ ही पाप का बाप है। लोभ यानी लालच, जो इंसान को गलत राह पर ले जाता है। मुनि श्री ने बताया कि अत्यधिक पाने की लालसा व्यक्ति को चोरी, झूठ और दूसरों को नुकसान पहुंचाने जैसे पाप कर्मों के लिए प्रेरित करती है।

लोभ मन की शांति को नष्ट कर जीवन को अहित की ओर मोड़ देता है। जैन दर्शन में भी लोभ को आत्मा के पतन का बड़ा कारण माना गया है। इस अवसर पर मुनि श्री मेघदत्त सागर ने कहा कि लोभ पापस्य मूल कारणम यानी लोभ पाप का मूल कारण है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चोर चोरी सिर्फ अपनी लालच की पूर्ति के लिए करता है, जो अंततः दुर्गति का कारण बनता है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहीं।

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