यशोदय तीर्थ पर चल रहे भव्य पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान में प्रातःकाल नवकिरण के साथ तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। बधाइयां देने के बाद सौधर्म इंद्र द्वारा अयोध्या की तीन परिक्रमा, अयोध्या में दरबार में सौधर्म -शचि का मंगल प्रवेश के अलौकिक दृश्य की प्रस्तुति हुई। इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मुनि सुधासागर महाराज के प्रवचन भी हुए। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
महरौनी (ललितपुर)। नेत्र ज्ञान से ही सम्यक दर्शन होता है और वीतरागी प्रभु महावीर का दर्शन सम्यक दर्शन है। यह उद्गार जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने भगवान महावीर के जन्मकल्याणक पर कहे। उन्होंने कहा कि जब किसी को नजर लगती है तो वह नेत्र से ही लगती है क्योंकि बाकी इंद्रियां अपना कार्य करती हैं पर नेत्र की बात अलग है। आंखों से दृष्टि निकले तो नजर लगा देते हैं। इसलिए कर्ण दोष, नासिका दोष नहीं, दृष्टि दोष कहा जाता है। इसीलिए जब दर्शन करते हैं तो वो कराते हैं हमारे नेत्र। जिससे हमारे पापों का गलन होता है। दृष्टि की एक अलग ही ऊर्जा है। इसीलिए जैनाचार्यों ने देवदर्शन का महत्व को बताया है और कहा दर्शनम देव देवस्य दर्शनम पाप नशनम। दर्शनम स्वर्ग सोपानम दर्शनम मोक्ष साधनम। गुरुदेव ने बताया कि इंद्रियों के साथ ज्ञान के जुड़ने के बाद वह सार्थक है क्योंकि जब व्यक्ति आंख से देखता है तो वो आंख से नहीं, ज्ञान से देखता है। एक वस्तु में एक ही नजरिया न रखें, उस वस्तु को अलग-अलग दृष्टि से देख अलग-अलग ऊर्जा को प्राप्त कर सकते हैं।

जन्म पर दी बधाइयां
यशोदय तीर्थ पर चल रहे भव्य पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान में प्रातःकाल नवकिरण के साथ तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। बधाइयां देने के बाद सौधर्म इंद्र द्वारा अयोध्या की तीन परिक्रमा, अयोध्या में दरबार में सौधर्म -शचि का मंगल प्रवेश के अलौकिक दृश्य की प्रस्तुति हुई। दोपहर में ऐरावत हाथी पर आरूढ़होकर सौधर्म -शचि द्वारा तीर्थंकर बालक का पाण्डुक वन की ओर प्रस्थान पाण्डुक शिला पर 1008 कलशों द्वारा तीर्थंकर बालक अभिषेक और श्रृंगार किया गया।
निकाली गई शोभायात्रा
भगवान की जन्मकल्याणक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सौधर्म इंद्र ऐरावत हाथी पर तीर्थंकर बालक को लेकर चल रहे थे। वहीं हाथी पर महायज्ञ नायक, चक्रवर्ती अपने हाथी पर सवार होकर कर दिग्विजय यात्रा की शोभा बना रहे थे। रजत रथ में भगवान जिनेंद्र विराजमान थे। सारे नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया। घरों के आगे रंगोली और दीपकों से सजाया गया। शोभायात्रा बानपुर चौराहे से प्रारंभ होकर गांधी चौक, इंदिरा चौराहे होते हुए कार्यक्रम स्थल यशोदय तीर्थ पहुंची। शोभायात्रा में जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर की उपस्थिति भक्तजनों में भक्ति ऊर्जा बढ़ा रही थी। शोभायात्रा में महिलाएं वेशभूषा में सजी-संवरी चल रही थीं। बालिका मंडल डांडिया नृत्य करती चल रही थीं। वहीं युवाओं की टोली भक्ति संगीत में थिरक रही थी। शोभायात्रा की भव्यता नगर के गौरव को बढ़ा रही थी।
शोभायात्रा के बाद हुआ जन्माभिषेक
शोभायात्रा का समापन यशोदय तीर्थ स्थल पर हुआ, जहां भगवान का जन्माभिषेक हुआ। शोभायात्रा में श्री सुधासागर यशोदय व्यायाम शाला के युवकों ने अपने करतबों से सबका मन मोह लिया। बालिका मण्डल ने लेजमों से बेहतरीन प्रदर्शन किया। चौबीसी समवशरण के सभी पात्र बग्घियों पर सवार होकर धर्म प्रभावना बढ़ा रहे थे। उदयपुर के भारत बैंड के भजनों पर श्रद्धालु झूमे।
सजा नाभिराय का दरबार
रविवार की शाम को महाराज नाभिराय दरबार, राज्य व्यवस्था तत्व चर्चा, मरूदेवी का आगमन, सोलह स्वप्न का फलादेश, गीत-नृत्य, छप्पन कुमारियों द्वारा भेंट समर्पण की प्रस्तुति की गयी। भव्य पंचकल्याणक महोत्सव में माता-पिता बनने का सौभाग्य आनंद सराफ, स्नेहलता जैन, सौधर्म इंद्र चक्रेश बुखारिया कपिल बुखारिया, कुबेर इंद्र अभय घिया, महायज्ञ नायक अजित खंजाची, ईशान इंद्र महेंद्र बाबा, सानत इंद्र बनने का सौभाग्य ऋषभ कठरया को प्राप्त हुआ। सारथी बनने का सौभाग्य अशोक पायवाले को प्राप्त हुआ। सभी धार्मिक क्रियाएं ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के दिशा-निर्देश में संपन्न हुईं।
जगह-जगह हुआ स्वागत
नगर में भगवान महावीर जयंती और भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया और भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसका जगह जगह व्यापार मंडल, समाजसेवी संस्थाओं , महरौनी मीडिया एवं राजनीतिक संगठनों ने स्वागत किया और फल एवं मिष्ठान वितरण किया। सभी ने मुनिश्री सुधासागर महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस मौके पर डॉ. हरगोविंद राय, प्रमोद बड़ोनिया, देवेंद्र सिंह सिकरवार, उदयभान सिंह, पुरुषोत्तम तिवारी, शिवम सिंह, राहुल सोनी, रूपनारायण तिवारी, सुखदेव सेन, सेवक कुशवाहा, गब्बर सिंह, राहुल सिंह, हल्के कुशवाहा, मुनीर, जानकी माते, हफीज खां, कलंदर, केशव अहिरवार, रमेश सहित बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित













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