अतिशयकारी तीर्थ यशोदय में मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य से भक्तजनों में धर्मप्रभावना बढ़ गई है। प्रातःकाल में मुनिश्री के सानिध्य में जिन अभिषेक और शांतिधारा हुई। पढ़िए राजीव सिंघई की यह विशेष रिपोर्ट…
महरौनी (ललितपुर)। अतिशयकारी तीर्थ यशोदय में मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य से भक्तजनों में धर्मप्रभावना बढ़ गई है। प्रातःकाल में मुनिश्री के सानिध्य में जिन अभिषेक और शांतिधारा हुई, जिसका सौभाग्य संजीव गंजबासौदा, जिनेश्वर दास ललितपुर, सेवालाल बांसवाड़ा, डॉ. राजकुमार सिंघई महरौनी को प्राप्त हुआ।
अपने विचारों से हम कर रहे बुरा
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा कि राम भरोसे जो रहे वह पर्वत पर हरयाये। संकट से और दुश्मनों से डरो मत क्योंकि यही आपका परिमार्जन कर ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। बगीचे के पौधे एक दिन जल न मिले तो मुरझा जाते हैं, लेकिन जंगल के वृक्षों को जल भी ना मिले तो भी लहराते हैं। इसी प्रकार पारसनाथ की पहचान भी कमठ से हुई, वह उपसर्ग न करता तो आज पारसनाथ इतनी महिमा ना होती। अच्छे चिंतन से मन भी अच्छा होता है। अगर मन बुरा विचार कर रहा है तो यह मेरा अहित कर रहा है। हमारे बुरे विचारों से हम स्वयं को बुरा बना रहे हैं, जिससे अशांति हो रही। जिस प्रकार रावण की आंख ने सीता का बुरा देखा है और वह हमेशा के लिए बुरा हो गया, उसका विनाश हो गया। रावण के विनाश की जड़ यही है। शूपर्णखा क्योंकि यह स्त्री की माया है और उसके झूठ के कारण रावण मृत्यु को प्राप्त हुआ। रावण को अपनी आंख अभिशाप हो गई।

किया जिज्ञासा सामाधान
शाम को जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम में मुनिश्री ने श्रावकों की जिज्ञासा का समाधान किया । मुनिश्री सुधासागर महाराज की आहारचर्या कराने का सौभाग्य अनिल दिलीप मिठया एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को आहार कराने का सौभाग्य राजेंद्र जिनेश मलैया को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन संजीव शास्त्री और शुभम मोदी ने किया।













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