गणिनी आर्यिका श्री प्रज्ञामति माताजी का आज 13 मई 2024 सोमवार को अनंतानंत सिद्धों की भूमि और 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि तीर्थराज सम्मेद शिखरजी के बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री शांति सागर धाम में अभिनंदन नाथ भगवान के गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक दिवस पर प्रातःकाल ब्रह्मवेला में 4 बजकर 10 मिनट पर णमोकार महामंत्र का श्रवण करते हुए सम्यक समाधिमरण हो गया। पढि़ए अशोक कुमार जेतावत की रिपोर्ट ……
धरियावद। समाधिस्थ दिगंबर जैनाचार्य श्री अभिनंदन सागर जी महाराज, समाधिस्थ मुनि श्री दया सागर जी महाराज की प्रमुख शिष्या गणिनी आर्यिका श्री प्रज्ञामति माताजी का आज 13 मई 2024 सोमवार को अनंतानंत सिद्धों की भूमि और 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि तीर्थराज सम्मेद शिखरजी के बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य चरित्र चक्रवर्ती श्री शांति सागर धाम में अभिनंदन नाथ भगवान के गर्भ एवं मोक्ष कल्याणक दिवस पर प्रातःकाल ब्रह्मवेला में 4 बजकर 10 मिनट पर णमोकार महामंत्र का श्रवण करते हुए सम्यक समाधिमरण हो गया।दिगंबर जैन मुनिश्री अपूर्व सागर जी महाराज ससंघ ने आर्यिका प्रज्ञामति माताजी के समाधिमरण को श्रमण संस्कृति की अपूरणीय क्षति बताया है। मुनिश्री ने कहा कि इस अवसर पर उनके गुणों का गुणानुवाद कर श्रद्धांजलि, भावांजलि, पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। करावली (सलूंबर) में आयोजित धर्मसभा में मुनि संघ और उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं ने 9 बार णमोकार मंत्र का उच्चारण करके माताजी को विनयांजलि दी।
गुरु के प्रति रही अनन्य भक्ति और समर्पण
सेवाचंद्रिका गणिनी आर्यिका प्रज्ञामति माताजी का जन्म कुंडा (सेमारी) में हुआ था। आपकी गृहस्थ अवस्था की बहिन और वर्तमान में गुरु परिवार की भी बहिन गणिनी आर्यिका सुप्रकाश मति माताजी, ने दोनों संघ सहित हाल ही में उदयपुर से ससंघ पदयात्रा कर अयोध्या तीर्थ होते हुए तीर्थराज सम्मेद शिखर जी तक पहुंचकर तीर्थ वंदना की थी।सेवाचंद्रिका गणिनी आर्यिका प्रज्ञामति माताजी ने 12 मई 2024 को सायं 5 बजे प्रतिक्रमण के पश्चात् सभी प्रकार के आहारों का त्याग कर दिया था। इसी के साथ राष्ट्रसंत उपसर्ग विजेता गणिनी आर्यिका सुप्रकाश मति माताजी का संबोधन प्रारंभ हो गया था।
13 मई को प्रातः ब्रह्म मुहूर्त वेला में निर्यापकाचार्य श्री वैराग्य नंदी जी महाराज, गणिनी आर्यिका श्री सुप्रकाश मति माताजी ससंघ सान्निध्य और चतुर्विध संघ की उपस्थिति में पूर्ण जाग्रत अवस्था में णमोकार महामंत्र का श्रवण करते हुए सम्यक समाधिमरण को प्राप्त हो गईं। यह 69 वर्षीय माताजी के 46 वर्ष की आर्यिका दीक्षा काल में देव, शास्त्र और गुरु के प्रति अनन्य भक्ति और समर्पण का ही फल था, जो आज तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर जी के आचार्य शांतिसागर धाम से ऊर्ध्वगमन कर देवलोक में विराजमान हो गए। प्रातः 8 बजे माताजी के पार्थिव शरीर की डोलयात्रा निकाली गई एवं तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की पावन भूमि पर चतुर्विध संघ की उपस्थिति में विधि-विधानपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया।













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