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तीन परिवारों को सिंघई की उपाधि से किया अलंकृत : हमेशा अपनों के हाथ से लेना चाहिए गंधोदक-मुनि सुधासागर महाराज


जगतपूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने सकल दिगम्बर जैन समाज के सभी पुरुषवर्ग को सामूहिक रूप से जिनेंद्र भगवान की अभिषेक की विधि एवं अभिषेक-शांतिधारा का महत्व समझाया। उन्होंने समझाया कि कौन-कौन अभिषेक नहीं कर सकता। पढ़िए राजीव सिंघाई की विशेष रिपोर्ट…


पृथ्वीपुर। जगतपूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने सकल दिगम्बर जैन समाज के सभी पुरुषवर्ग को सामूहिक रूप से जिनेंद्र भगवान की अभिषेक की विधि एवं अभिषेक-शांतिधारा का महत्व समझाया। उन्होंने समझाया कि कौन-कौन अभिषेक नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पांच लोग हैं, जो अभिषेक नहीं कर सकते। पहला तिर्यंच अर्थात जानवर वगैरह, दूसरा जिसने जैनकुल में जन्म नहीं लिया हो, तीसरा जिसने स्त्री पर्याय में जन्म लिया हो, चौथा जिसे समाज द्वारा बहिष्कृत किया गया हो, पांचवा जिसे चर्म रोग हो, कोढ़ी,कुष्ठी हो। अगर आप इनमें से नहीं हैं और फिर भी आप प्रभु का अभिषेक नहीं करते हैं तो यही प्रतिमाएं हमें नकारात्मक एनर्जी देती है।

मन्दिर ऊर्जा के स्त्रोत

मन्दिर ऊर्जा के बहुत बड़े स्रोत होते हैं। अगर हम इनका लाभ नहीं लेते हैं तो यही भगवान की प्रतिमाएं हमारे ऊपर विपरीत प्रभाव देती हैं क्योंकि भगवान तो बहुत पहले मोक्ष चले गए,लेकिन ये भक्तों के भगवान हमारी खातिर सिद्धालय से इस धरा पर आए। उन्होंने कहा कि गंधोदक किससे लेना-जो अपने हाथ का हो अथवा अपनों के हाथ का हो। इसलिए स्त्रियों को सदैव अपने पति से और माता को अपने स्वामी या बेटे से गंधोदक लेना चाहिए। ये हाथ परिग्रह से मलीन होते हैं, दान से शुद्ध होते हैं।

सिंघई उपाधि से किया अलंकृत

इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज पृथ्वीपुर द्वारा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव पृथ्वीपुर में प्रथम बार गजरथ चलवाने के उपलक्ष्य में पुरुषोत्तम, दिनेश,कमलेश कुमार जैन, प्रिंस, प्राशुल, पीयूष, अयांश जैन चौधरी परिवार एवं दयाचन्द्र, महेंद्र, सचिन, सोमिल, सन्देश जैन (सिमरा वाले) परिवार तथा कमलेश कुमार, विमलेश कुमार, आयुष कुमार जैन, तेजस, आरुष जैन बुखारिया परिवार को सिंघई उपाधि से अलंकृत किया गया।

पूज्य गुरुदेव का आज का मंगल पड़गाहन एवं आहारदान देने का सौभाग्य रविन्द्र कुमार, सुषमा जैन (झांसी) परिवार को प्राप्त हुआ।

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