अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज, आर्यिका प्रसन्न मति माताजी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर के सानिध्य में चल रहे सात दिवसीय श्री भक्तामर महामंडल विधान अनुष्ठान के छठे दिन सात काव्य की आराधना करते हुए 392 श्रीफल के साथ 392 अर्घ्य सौधर्म इन्द्र अशोक कुमार घाटलिया परिवार ने समर्पित किए। आज 45वें काव्य की विशेष आराधना आठ परिवार के द्वारा की गई। पढ़िए ये विशेष रिपोर्ट…
पारसोला। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज, आर्यिका प्रसन्न मति माताजी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर के सानिध्य में चल रहे सात दिवसीय श्री भक्तामर महामंडल विधान अनुष्ठान के छठे दिन सात काव्य की आराधना करते हुए 392 श्रीफल के साथ 392 अर्घ्य सौधर्म इन्द्र अशोक जी घाटलिया परिवार ने समर्पित किए।

सुबह 5 बजे से अनार, अंगूर, दही, घी, संतरा, शक्कर, दूध से भगवान का अभिषेक अनुष्ठान में बैठे 108 श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किया गया। अभिषेक में शांतिधारा का सौभाग्य चेतना-विनोद जैन को प्राप्त हुआ।

आज 45वें काव्य की विशेष आराधना सलोनी जैन खमेरा, रमेश वेगरिया,चेलना देवी परसमल वगेरिया, चेतना देवी विनोद पचोरी, अजीतमल वेडा,श्रीपाल ,संदीप मैदावत, नरेन्द्र जितेंद्र पंचोरी, मैदावत के द्वारा की गई। कार्यक्रम का आयोजन दशा हुमड़ दिगंबर जैन समाज, पारसोला की ओर से किया जा रहा है। शाम को 48 दीपकों से भक्तामर की आराधना मनोरमा महिला मंडल द्वारा की गई। सभी विधि-विधान पंडित कीर्तिश वगेरिया के निर्देशन में किया गया।

47 काव्यों की आराधना पूरी
विधान में अब तक 48 में से 47 काव्यों की आराधना हो चुकी है। आगामी 21 अप्रैल को एक काव्य की आराधना के साथ अनुष्ठान का समापन होगा। वहीं बीते 19 अप्रैल की रात्रि में 1008 दीपकों के साथ सहस्रनाम की आराधना की गई। यह आराधना 15 परिवार द्वारा की गई।

इसमे अजीत मल सेठ,मनीष पचोरी, राकेश घटलिया,ऋषभ चंदावत,नितेश कड़वावत,प्रकाश पचोरी, अरविंद्र वगेरिया,मंगलीला वगेरिया,नरेश घाटलिया,श्रीपाल मैदावत,मांगलीला डागरिया,महावीर मेदावत,प्रकाश गेंदमल पचोरी, जयंतिलाल पचोरी,सुधीर वगेरिया ने किया ।

प्रतिदिन गंधोदक लगाने का लें संकल्प
इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि गंधोदक लगने असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। स्वर्ग के देवता भी गंधोदक लगाते हैं। गंधोदक पाप के नाश का कारण है, मन को निर्मल करता है। मैना सुंदरी ने गंधोदक के माध्यम से अपने पति श्रीपाल सहित 700 कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के रोग को दूर किया था। मुनियों के शरीर से स्पर्शित हवा हमें लग जाए तो रोग दूर हो जाते है।

गंधोदक तो भगवान के शरीर से स्पर्शित है। भगवान की प्रतिमा अनेक मंत्रों से अभिमंत्रित होती है, इसलिए इसे छूने वाले जल आदि द्रव्य अपने आप में पवित्र और शक्तिशाली हैं। वैज्ञानिकों ने माना है कि गंधोदक से रोगों का नाश किया जा सकता है। शरीर में चर्म रोग भी हो तो प्रतिदिन गंधोदक लगाने से रोग दूर हो जाता है। प्रतिदिन घर में गंधोदक छिड़काव करना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।

हवन से दूर होती है नकारात्मक ऊर्जा
मुनि श्री ने कहा कि प्रतिदिन हवन करने से भी घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है क्योंकि हवन में आहुति देते समय व्यक्ति अनेक मंत्रों का उच्चारण करता है। माला जाप करने में की तुलना में हवन में आहुति देकर जाप करने से हजारों गुणा अधिक फल मिलता है। आप को संकल्प करना चाहिए कि प्रतिदिन गंधोदक लगाऊंगा और हवन करूंगा।

21 अप्रैल को होगा विशेष अनुष्ठान
विधान के समापन पर 21 अप्रैल को एक विशेष अनुष्ठान होगा। यह अनुष्ठान ज्योतिष के आधार पर 12 राशि, 27 नक्षत्र, 9 ग्रहों के आधार पर होगा। इस अवसर पर विशेष हवन और पूजन भी होगा।

इनका भी सहयोग रहा
कार्यक्रम में जयंतीलाल कोठरी, बाबूलाल सरिया, प्रकाश पंचोरी, महावीर मेदावत, दीपेश वेगरिया, आदेश घाटलिया, चंदमल राजावत, रमेश वेगरिया, पारसमल वेगरिया, सूरजमल पंचोरी, सूरजमल कड़वावत, संदीप वेगरिया, कुलदीप वेगरिया, मांगलीलाल वेगरिया, संजय वेगरिया रमेश पंचोरी आदि का भी सहयोग रहा।













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