पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थ सागरजी ने पथरिया में अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जन्म से लेकर मृत्यु तक, हम रिश्तों के जाल में बंधे रहते हैं माता-पिता, भाई बहन, मित्र, जीवन साथी, बच्चे। पथरिया से पढ़िए, यह खबर…
पथरिया। अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थ सागरजी ने पथरिया में अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जन्म से लेकर मृत्यु तक, हम रिश्तों के जाल में बंधे रहते हैं माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, जीवनसाथी, बच्चे। इन सबके बिना जीवन अधूरा लगता है, लेकिन एक गूढ़ सत्य यह भी है, हर रिश्ता निभाना ज़रूरी है, लेकिन अपनी पहचान मिटाकर नहीं। आज के युग में हम अक्सर दूसरों को खुश रखने के चक्कर में अपने मन की आवाज़ को दबा देते हैं।
हमारी सोच, हमारे सपने, हमारी इच्छाएँ सब कुछ किसी और की खुशी के नाम पर बलिदान हो जाती हैं लेकिन, क्या यही समझदारी है ? नहीं। समझदार वही है जो रिश्तों को निभाते हुए भी खुद की आत्मा को जिंदा रखे। जो हाँ कहे तो प्रेम से, और ष्नाष् कहे तो भी सम्मान से। कभी-कभी ‘ना’ कहना भी एक आत्म-संरक्षण होता है।
जैसे नदी अपनी धार नहीं छोड़ती, लेकिन रास्ते में पत्थर भी नहीं तोड़ती, उसी तरह हमें भी अपने मूल स्वभाव को बनाए रखते हुए, रिश्तों के साथ सामंजस्य रखना चाहिए। सच्चा रिश्ता वही होता है जो आपको बदलने की नहीं, स्वीकारने की ताकत दे। जो आपको और बेहतर बनाने की प्रेरणा दे कृ लेकिन आपकी आत्मा को कुचलने की इजाज़त न ले। इसलिए, प्रेम कीजिए, त्याग कीजिए, लेकिन खुद को खोने मत दीजिए।













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