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पूर्व मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया : आचार्यश्री ने आपदा से मुक्ति से बचाव के उपाय बताए 


आत्मा की रक्षा, इंद्रियों को विषय भोगों राग द्वेष से नियंत्रित संकुचित करें। साधु की भांति सम्यक समता भाव धर्म धारण करें। यह प्रेरणादायी वाणी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में दी। टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर…


टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने जीवन में आपदा और कष्ट क्यों आते है, इससे बचने के क्या उपाय हैं, कर्माे का क्या प्रभाव शरीर आत्मा पर होता है, अहिंसा , सत्य धर्म का जीवन में क्या महत्व है? इसकी प्रवचन में विवेचना की। संसारी प्राणी को आपदा या कष्ट से निराशा होती है और निराशा दूर करने की वह खोज करता है रोग बीमारी की आपदा डॉक्टर से, चोरी होने पर पुलिस की मदद लेता है। वर्तमान में गरीबी दरिद्रता भी आपदा कष्ट है। यह देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की।

राजेश पंचोलिया ने कहा कि आचार्य श्री ने प्रवचन में प्रबोधन में बताया श्री आदिनाथ भगवान से लेकर श्री महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकरों ने कष्ट आपदा से दूर होने के लिए धर्म का उपाय बताया है। धर्म उपदेश को सुनकर, धारण कर ग्रहण करना चाहिए। जिस प्रकार धन उपार्जन करने के लिए आप मेहनत करते हैं पसीना बहाते है ,गर्मी और कष्ट भी महसूस नहीं होता है, उसी प्रकार धर्म धारण करते समय संयम और तप से कष्ट नहीं होता है।

धर्म के बिना सभी निर्धन दरिद्र है 

संत आत्मा के कल्याण के लिए संयम धारण करते हैं। आचार्य श्री ने 148 कर्मों की चर्चा कर बताया कि जिस प्रकार इंजीनियर मकान बनाता हैं उसी प्रकार निर्माण ,नाम ओर आयु कर्म शरीर को निर्धारित करते हैं संसार में जन्म मरण से छुटकारे का उपाय धर्म से प्राप्त होता हैं जीवन में अहिंसा का महत्व है राग द्वेष विषय भोगों से आत्म धर्म को हिंसा से बचाने का पुरुषार्थ करना चाहिए। इसका उपाय बताया कि कछुआ जिस प्रकार संकट आने पर शरीर के अंगों को संकुचित नियंत्रित कर शरीर को कठोर बनाता हैं। उसी प्रकार आपको भी 5 इंद्रियों को संकुचित और नियंत्रित कर तप संयम से आत्मा की रक्षा करना चाहिए। धर्म के बिना सभी निर्धन दरिद्र है जीवन में प्राप्त तीर्थंकर कुल से जीवन को उच्च बनाकर मानव जीवन सफल करे

पुण्यवान व्यक्ति को आपदा, विपदा नहीं आती

आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री दिव्ययश मति माताजी के प्रवचन हुए। आपने अमीर गंज को धन धान्य और पुण्य से अमीर बताया। इसी पुण्य के कारण आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का चातुर्मास टोंक समाज को मिला है। उन्होंने कहा कि जीवन में धर्म का पुरुषार्थ करो सर्वाेच्च गुणों की संपदा युक्त मानव जीवन बनाना चाहिए। गुणों की संपदा में उदारता ,दानशीलता, करुणा, संवेदना ,सहानुभूति की भावना होना चाहिए। पुण्यवान व्यक्ति को आपदा, विपदा नहीं आती है। भाग्य रूठने से ओर पुण्य कमजोर होने से संचित धन भी नष्ट हो जाता है।दान तन,मन और धन से किया जाता हैं। नदी देती हैं तो पानी मीठा होता हैं सागर समुद्र लेता है। इस कारण उसका पानी खारा होता हैं और नाला पानी का संग्रह करता हैं उसका पानी सड़ांध देता हैं इसी प्रकार आपको भी धर्म कार्य में दान देना चाहिए। दान और त्याग में त्याग बड़ा होता हैं।

धर्म प्रचारक प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि धर्म सभा में श्रीजी और पूर्वाचार्य का चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन अहिंसा सर्किल जिनालय के श्रावक व श्राविकाओं ने किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। इस मौके पर झाड़ोल से पधारे कलाकार भाई गोरधन के भक्तिमय भजनों पर बड़े भक्ति भाव से भक्ति नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं अष्टद्रव्य समर्पित किया एवं सुनील सर्राफ ने पूजन व्यवस्था में सहयोग किया। इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने सभी श्रावकों को कूलर व ऐसी का त्याग देकर नियम दिलाया। आचार्य श्री संघ के आहार के चौके लगाने के लिए बाहर के नगरों से काफी भक्त पधार रहे हैं। टोंक सहित इंदौर, पारसोला, निवाई के चौके लगे हैं। कोलकाता वालांे को आचार्य श्री का आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

आचार्यश्री का मार्गदर्शन किया प्राप्त 

गुरुवर दोपहर को टोंक विधायक पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट जैन नसिया आमीररगंज पधारे। वहां आदिनाथ जिनालय में श्रीफल भेंटकर दर्शन किए। आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर अनेक विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त कर आशीर्वाद लिया एवं आचार्य श्री ससंघ की दिनचर्या से बहुत प्रभावित हुए। समाज के लोगों ने उनको 24 घंटे में एक बार आहार व जल ग्रहण करने पर वो भी विधि पूर्वक ओर अनेक चर्या के बारे में बताया। इससे पायलट बहुत प्रभावित हुए। आचार्य श्री ने उनको पुस्तक आचार्य शांतिसागर जी महाराज के जीवनी की प्रदान की।

कार्यक्रम में यह भी रहे मौजूद 

इस मौके पर भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, कमल आंडरा, राजेश सर्राफ, राजेश बोरदा, धर्मचंद पासरोटियां, सुरेश मलारना, सुरेश संघी, कमल सर्राफ, रोनित श्यामपुरा, नीटू छामुनिया, पंकज फूलेता, ओम ककोड़, एंजे दाखिया, अंशुल आरटी, अम्मू छामुनिया, विनायक कल्ली, लोकेश कल्ली, राजेश शिवाड़िया आदि उपस्थित रहे।

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