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भजन संध्या का हुआ आयोजन : भावना का विस्तार ही भजन का लक्ष्य–अमित जैन टकसारी 


जैन धर्मशाला में संत विगुण सागर जी महाराज के सानिध्य में भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें पुरुष, महिलाओं व बच्चों ने भजन गाए व नृत्य किया। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…


अम्बाह। जैन धर्मशाला में संत विगुण सागर जी महाराज के सानिध्य में भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें पुरुष, महिलाओं व बच्चों ने भजन गाए व नृत्य किया। भजन संध्या का आयोजन अमित जैन टकसारी व विकास जैन द्वारा किया गया। इसका शुभारंभ ऊषा भण्डारी ने मंगलाचरण के साथ किया। आयोजन में अमित जैन टकसारी ने कहा कि भगवान के प्रति समर्पण का भाव भक्ति कहलाता है।

भक्त की उत्कृष्ट लालसा उसे भक्ति के लिए प्रेरित करती है। नाम जप, कथा और कीर्तन जैसे माध्यमों से भक्त अपने भगवान को रिझाकर उनकी कृपा प्राप्त करता है। भक्ति भाव है या रस यह तो नहीं पता लेकिन भक्ति के माध्यम से भगवान को प्राप्त अवश्य किया जा सकता है। अमित जैन ने कहा कि प्रत्येक युग में विशेष शक्ति संपन्न भक्तों ने जन्म लिया है। भावना का विस्तार ही भजन का लक्ष्य है। संगीत के माध्यम से जब भक्ति गीतों को प्रस्तुत किया जाता है तो उसे पूरे वातावरण में सात्विक गुणों में वृद्धि होने लगती है और मनुष्य की चेतना ऊर्ध्वमुखी होकर परमात्मा में विलीन होने लगती है। यही इस भजन संध्या का लक्ष्य है।

वहीं आयोजन में भजन ‘दरबार बुलाते हो रोतों को हंसाते हो, मेरे मन में पारसनाथ मेरे दिल में पारसनाथ’, ‘दुनिया भर में हुकुम चले मेरे दादा गुरुवर का’ एवं करुणा के भंडार हमारे महावीरा जैसे भजनों को गाकर भक्ति रस की धारा बहाई। महिलाओं ने जैन भजन गाते हुए प्रभु के सामने नृत्य किया।

अमित जैन व विकास जैन ने सभी विजेताओं को उपहार भेट करते हुए कहा कि भजन संध्या कार्यक्रम करने से भक्ति भावना के साथ आपसी मेलजोल भी बढ़ता है, जिससे धर्म की प्रभावना होती है। इस अवसर पर राकेश भंडारी, संतोष जैन, ओपी जैन, कुलदीप जैन, राहुल नायक, सुशील जैन, राजुल जैन, सिमरन जैन, मिली जैन, राहुल जैन, आकाश जैन, पूरनचंद जैन, रजनी जैन सहित अनेक लोग मौजूद थे।

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