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एक हजार आठ कलशों से हुआ दर्शनोदय तीर्थ पर महामस्तकाभिषेक : अमरोद में तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा का भव्य स्वागत, राष्ट्रसंत सुधासागरजी महाराज ने दिए प्रेरक संदेश


अमरोद में राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा और 1008 कलशों से हुए महामस्तकाभिषेक ने श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना दिया। धर्मसभा में राष्ट्रसंत ने भारतीय संस्कृति, सुदामा-कृष्ण प्रसंग और नशा मुक्ति पर प्रेरक विचार रखे। पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट…


अशोकनगर जिले के अमरोद गांव में दर्शनोदय तीर्थ परिसर में रविवार को भव्य धार्मिक आयोजन हुआ। राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ, क्षुल्लक श्री गम्भीर सागरजी, क्षुल्लक श्री विदेह सागरजी महाराज, ब्रह्मचारी प्रदीप भाईया व मुकेश भाईया के मार्गदर्शन में तीर्थ चक्रवर्ती रथयात्रा का शुभारंभ सहोदरी से हुआ जो अमरोद पहुंची।

स्वागत में उमड़ा जनसैलाब

अमरोद पहुंचने पर मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री राव ब्रजेन्द्र सिंह यादव और जिला पंचायत अध्यक्ष अजय यादव के नेतृत्व में अंचल के हजारों लोगों ने रथयात्रा का भव्य स्वागत किया। इस शोभायात्रा में रजत विमान सहित चक्रवर्ती रथ, पुष्प सज्जा और भक्ति गीतों के साथ वातावरण धर्ममय बन गया।

महामस्तकाभिषेक में 1008 कलशों का प्रयोग

दर्शनोदय तीर्थ पर भगवान की प्रतिमाओं का एक हजार आठ कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। विभिन्न गांवों से आए श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के साथ जल, दूध, चंदन, केसर और पुष्पों से भगवान का अभिषेक किया। पूरा परिसर “जय जिनेन्द्र” के उद्घोषों से गूंज उठा।

धर्मसभा में राष्ट्रसंत का प्रवचन

धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा – “जहां से सारी दुनिया का सोच समाप्त होता है, वहीं से भारतीय सोच प्रारंभ होती है।” उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति मात्र मनुष्यों द्वारा नहीं, बल्कि भगवानों द्वारा पुष्पित और पल्लवित की गई है। साधु संघ नगर-नगर विहार कर जन-जन को प्रभु संदेश पहुंचा रहा है।

सुदामा-कृष्ण प्रसंग से दी जीवन प्रेरणा

संतप्रवर ने सुदामा-कृष्ण संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे श्रीकृष्ण ने सुदामा के चरण धोकर सेवा की, वैसे ही दिगंबर साधु भी अपने संयम और त्याग से समाज को धन्य करते हैं। साधु सदा भक्तों के कल्याण की भावना रखते हैं।

नशा मुक्ति और परिश्रम पर संदेश

मुनिश्री ने कहा कि “जिस दिन भारत नशामुक्त होगा, उसी दिन भारत समृद्ध बनेगा।” उन्होंने पसीने की कमाई को पवित्र बताया और युवाओं से मेहनत और शिक्षा को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।

समाज के प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेन्द्र अमन, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कनार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा वातावरण

पूरे अमरोद क्षेत्र में धार्मिक उल्लास, भक्ति और शांति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रथयात्रा और महामस्तकाभिषेक में हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

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