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द्रोणगिरि में आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज का मनाया 28वां दीक्षा दिवस

-दिव्यांगों ने प्रस्तुत किये मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम

द्रोणगिरि@राजेश जैन रागी। दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि (लघु सम्मेदशिखर जी) में पूज्य संस्कार प्रणेता आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज का मंगल 28 वां दीक्षा दिवस बीते बुधवार को विविध कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश भर से आये गुरुभक्तों ने पूज्य गुरुदेव की आराधना की। कार्यक्रम का चित्र अनावरण दीप प्रज्ज्वलन करते हुए कार्यक्रम को प्रारम्भ किया गया। कार्यक्रम का मांगलचरण रेनू जैन, दिल्ली ने किया। आशा जैन, पानीपत ने अपने भजनों के माध्यम से गुरुदेव की आराधना की। दीक्षा दिवस के अवसर पर पूज्य गुरुदेव के पाद प्रक्षालन एवं पूजन करने का सौभाग्य रमेश जैन, विकास जैन दिल्ली को, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य नरेश भूषण जैन दिल्ली को, मंगल आरती का सौभाग्य सचिन जैन, अमित जैन (मेडिकल वाले) देहरादून को प्राप्त हुआ। दीक्षा दिवस के अवसर पर जीवन आशा परिवार (सौरभ सागर सेवा संस्थान, गाजियाबाद ) के द्वारा 108 दिव्यांगों को निशुल्क कृत्रिम अंग हाथ एवं पैर प्रदान किए एवं उनके द्वारा भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। दीक्षा दिवस के अवसर पर “आचार्य सौरभ सागर भोजनालय” का शिलान्यास रामेश जैन, विकास जैन दिल्ली वालों के द्वारा चौबीसी परिसर द्रोणगिरी में किया गया। दीक्षा दिवस के अवसर पर ही चौबीसी परिसर द्रोणगिरी में भव्य “सौरभ सागर निलय” का लोकार्पण हुआ। इसमें आधुनिक सुविधाओं से युक्त 33 कमरे हैं। सभी गुरुभक्तों ने मिलकर यह कार्य किया है। कार्यक्रम का सफल संचालन पं. संदीप जैन “सजल” ने किया। दोपहर के समय स्थानीय महिला मंडल ने “सुरेंद्र से सौरभ सागर” नाटिका प्रस्तुत कर पूज्य गुरुदेव का जीवन परिचय सभी को बताया। कार्यक्रम में दिल्ली, गाजियाबाद, देहरादून, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सरधना, लखनऊ, बाराबंकी, आरा, रुद्रपुर, जयपुर, जसपुर,भिंड, शिवपुरी, इटावा, बाँदा, परतापुर, बड़ौत, खेखड़ा, के साथ साथ बुंदेलखंड क्षेत्र से भारी जनसमुदाय उपस्थित रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने मे सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि के ट्रस्ट व प्रबंध समिति के कपिल मलैया, भागचंद पीलीदुकान, सुनील घुवारा, नरेन्द्र जैन, बर्धमान मलैया, अशोक जैन गाजियाबाद, जम्मूप्रसाद जैन गाजियाबाद, संजय जैन गाजियाबाद, अमित जैन, महिला मंडल बड़ामलहरा, युवा मंडल आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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