बड़वानी नगर में कल पधारे और विराजमान परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आप भगवान के सामने कभी हाथ मत फैलाइए, क्योंकि भगवान से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं है। पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट…
धामनोद/बड़वानी नगर। बड़वानी नगर में कल पधारे और विराजमान परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में धर्म सभा को संबोधित किया।
भगवान के समक्ष क्रिया का भाव
उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने कहा कि आप भगवान के सामने कभी हाथ मत फैलाइए, क्योंकि भगवान से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने समझाया कि भगवान हमें कुछ नहीं देते। हमारे आगम में बताया गया है कि निमित्त कुछ करता नहीं है और निमित्त के बिना कुछ नहीं होता। इसी कारण हम भगवान पर घटित करते हैं; भगवान कुछ करते नहीं हैं, पर भगवान के बिना कुछ संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि हम भगवान की भक्ति करते हैं, पूजा, अर्चना और आराधना करते हैं। हम मुनि आदि को आहार, बिहार, निहार कराते हैं, दान करते हैं, तीर्थ वंदना करते हैं और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इनसे पुण्य अर्जित होता है और वही पुण्य हमारे काम को सफल बनाता है। इस कारण हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं है।
क्रिया में भाव का महत्व
मुनि श्री ने रूढ़िवादिता से बचने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैन आगम हर बात का प्रमाण और कारण बताता है। यदि हमारे पास कारण है तो हम उसे करने को तैयार हैं। किसी भी क्रिया को केवल क्रिया समझकर नहीं करना चाहिए। यदि वह क्रिया आदत बन जाए तो उसका भाव समाप्त हो जाता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा, पाठ, स्वाध्याय, जप, तप आदि सभी क्रियाओं में भाव होना आवश्यक है। अन्यथा वह क्रिया व्यर्थ हो जाती है और केवल क्रिया-कांड बनकर रह जाती है। भावपूर्वक की गई क्रिया ही फल प्रदान करती है।
सभा और अन्य कार्यक्रम
मनीष जैन ने बताया कि सभा के पूर्व उपाध्याय श्री ने मंदिर में विराजित वेदियों पर भगवान के दर्शन किए। इसके साथ ही आचार्य श्री विराग सागर जी महा मुनिराज के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर चित्र अनावरण किया गया। इस अवसर पर समाज के युवा, बच्चे, महिला और पुरुष वर्ग उपस्थित रहे। सभा के पश्चात मुनि श्री की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर में सामयिक और धर्म संबंधित क्लास आयोजित हुई और शाम को आनंद यात्रा हुई।













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