आचार्य श्री विद्या सागर महाराज जी विश्व वंदनीय रहे हैंं। आज उनकी समाधि के बाद संतों, शिष्यों और श्रावकों के सुर बदले- बदले लग रहे हैं इन सबमें चर्चा यह भी है कि उनका उत्तराधिकारी निर्यापक मुनि श्री समय सागर महाराज जी होंगे या कोई अन्य? यह प्रश्न ही बना हुआ। इसे लेकर पढ़ें रेखा जैन, संपादक श्रीफल जैन न्यूज का यह विशेष अनुरोध पत्र….
आचार्य श्री विद्या सागर महाराज जी विश्व वंदनीय रहे हैंं। आज उनकी समाधि के बाद संतों, शिष्यों और श्रावकों के सुर बदले- बदले लग रहे हैं इन सबमें चर्चा यह भी है कि उनका उत्तराधिकारी निर्यापक मुनि श्री समय सागर महाराज जी होंगे या कोई अन्य? यह प्रश्न ही बना हुआ। संतों के वीडियो और श्रावकों के मैसेज जो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं, उसे देख कर लगता है कि जैसे निर्णय इन्हीं करना हो। क्यों हम अपने आराध्य के जाने के बाद इस प्रकार की बातें कर रहे हैं? आचार्य श्री जब भी यह निर्णय या चिंतन किया है, वह भविष्य को देख कर ही किया होगा।
ब्रह्मचारी विनय भैया ने कहा कि आचार्य श्री ने अपनी भावना और व्यवस्था मुनि श्री योग सागर महाराज को बताई है और अंतिम समय का एक वीडियो भी चल रहा है, जिसमें संतों और श्रावकों की उपस्थिति में यह कहा जा रहा है कि आचार्य श्री आप ने जो संघ के लिए दिशा -निर्देश दिए हैं, वह पूरा संघ मानेगा। इसका मतलब तो यही है कि आचार्य श्री अपनी भावना वहां उपस्थित शिष्यों को बता कर गए होंगे। आचार्य के सच्चे शिष्य तो तभी हम बन पाएंगे, जब उनकी आज्ञा और दिशा -निर्देश का पालन करेंगे। इन सब में यह संशय बना हुआ है कि उत्तराधिकारी मुनि श्री समय सागर जी महाराज ही होंगे या और कोई ? या आचार्य श्री यह संकेत दे कर गए कि संघ जिसे चाहे, उसे उत्तराधिकारी बना दे ? या उनके जाने के बाद हमारी आस्था, श्रद्धा में कमजोरी आ गई है कि हम उनके दिशा -निर्देश का पालन नहीं कर पा रहे हैं ? इन सब के कारण सोशल मीडिया पर जिस तरह से चल रहा है, वह अब बंद होना चाहिए। आचार्य ने 6 फरवरी को ही आचार्य पद त्याग दिया था फिर क्यों नहीं उनकी समाधि की घोषणा सार्वजनिक की गई? यह प्रश्न हो रहा तो क्यों नहीं हम यह स्वीकार कर लें कि आचार्य का निर्देश होगा, जो सार्वजनिक नहीं की जाए। वहां की परिस्थिति और कुछ होगी। यह अब वही बता सकते हैं, जिनका नाम विनय भैया ने लिया। हम सब के आराध्य मुनि योग सागर महाराज या विनय भैया… सभी से निवेदन है कि हम इन सब बातों को विराम देकर इंतजार करें कि आचार्य की भावना और निर्देश, आदेश समाज और संघ के लिए क्या था। इन सब की चर्चा कर हम आचार्य के प्रति अपनी श्रद्धा को कम न करें और न ही किसी की कम होने दें। संघ ने निर्णय किया है कि कुंडलपुर पहुंचने पर ही सब कुछ स्पष्ट होगा तो हम सब को तब तक इंतजार करना चाहिए और तब तक आचार्य श्री के किए कार्यों को जन- जन तक पहुंचाना चाहिए।













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