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दिवाली खुशियों वाली’ आएं, हाथ बटाएं

दीपावली का त्योहार आ गया है। सब लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दीपावली का त्योहार मनाते हैं। नए-नए कपड़े पहनना। मिठाई खाना। घर को दीपक से रोशन करना। भगवान की पूजा करना। आदि प्रक्रियाएं घर-घर में होती हैं। इस दौरान बहुत कुछ आप अपनी खुशी के लिए करते हैं।

पर कभी आपने सोचा है कि आज भी बहुत से व्यक्ति ऐसे हैं जो नए कपड़े, मिठाई आदि से वंचित रह जाते हैं। इसके लिए भी वे भीख मांगते रहते हैं। कहने का मतलब है कि वह अपनी खुशी के लिए आज भी भीख मांग रहे हैं। इसलिए भी भीग मांगते हैं कि हम कुछ लोगों की सहायता भी करते हैं, पर कब तक करेंगे सहायता! किस-किस त्योहार पर सहयोग करेंगे! हम क्यों नहीं उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं! यदि आपके मन में भी यही इच्छा होती है तो फिर क्यों न आप “दिवाली खुशियों वाली” अभियान से जुड़कर हमारा सहयोग करें। इस अभियान के तहर हम लोगों से दीपक दान (पैसा) में लेते हैं। उन पैसों से कुम्हार से दीपक बनवाते हैं और दीपक गरीब को देते हैं, जिसे वह बेचकर अपनी दिवाली को खुशियों के साथ मनाता है।

आपके सहयोग से दो परिवारों के चेहरे खुशी से खिल जाएंगे। पहला परिवार कुम्हार का है। दूसरा गरीब का, जिसने दीपक बेचे हैं। इससे अभियान से जो लाभ हुआ होगा, वह है दान कर पूण्य। आपके कारण दो परिवार आत्मनिर्भर बने। आपने पारंपरिक काम को बढ़ावा दिया। आपने मिट्टी से बने दीपक से दिवाली मनाई।

इस अभियान की शुरुआत 2019 में हुई थी। मात्र 15 दिन की महेनत के साथ तीन लाख दीपक के पैसे हमारे पाए आए थे। करीब 150 व्यक्ति ने यह सहयोग किया था। चार कुम्भकार से दीपक खरीदे गए थे और 46 व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाया गया था। इस बार आपसे सहयोग चाहते हैं की आप भी अभी से इस अभियान से जुड़ें और व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करे। इस बार हमारा लक्ष्य 15 लाख दीपक का है। यह आप के सहयोग से ही पूरा होगा। फिर आएं, एक दूसरे से मिलकर एक श्रृंखला बनाएं और अपने आपको इस ‘दिवाली खुशियों वाली’ अभियान की माला से जोड़ें। यह अभियान श्रीफल फाउण्डेशन के माध्यम से संचालित किया जाता है। आप सब अपने संस्थान के माध्यम इस अभियान को गति दें।

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