शास्त्रों में भी अनेकों उदाहरण मिलते हैं कि समय-समय पर अन्य संप्रदाय के लोगों ने भी दिगम्बर साधुओं की सुरक्षा की है। आज भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में एक दिगम्बर आचार्य श्री कामकुमार नंदी महाराज की निर्ममता पूर्वक हत्या की जाती है और शासन- प्रशासन पूर्णतः मूकदर्शक बना हुआ है। उक्त उद्बोधन आचार्य विनिश्चयसागर महाराज ने आचार्य श्री कामकुमार नंदी महाराज की हत्या के संदर्भ में आयोजित जैन समाज, भिण्ड की बैठक में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए दिया। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट..
भिण्ड । दिगम्बर जैन साधुओं की चर्या, क्रिया और आचरण किसी एक धर्म विशेष के मोहताज नहीं हैं क्योंकि दिगम्बर संत, साधु, मुनिराज केवल जैन धर्म के नहीं, जन-जन की आस्था के केंद्र होते हैं। दिगम्बर जैन साधु संत जब विहार करते हुए निकलते हैं तो न केवल जैन अपितु अजैन बंधु भी उनकी व्यवस्था में, उनकी चर्या में सहयोग करने के लिए तत्पर रहते हैं। शास्त्रों में भी अनेकों उदाहरण मिलते हैं कि समय-समय पर अन्य संप्रदाय के लोगों ने भी दिगम्बर साधुओं की सुरक्षा की है। आज भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में एक दिगम्बर आचार्य श्री कामकुमार नंदी महाराज की निर्ममता पूर्वक हत्या की जाती है और शासन- प्रशासन पूर्णतः मूकदर्शक बना हुआ है। उक्त उद्बोधन आचार्य विनिश्चयसागर महाराज ने आचार्य श्री कामकुमार नंदी महाराज की हत्या के संदर्भ में आयोजित जैन समाज, भिण्ड की बैठक में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए दिया।
दर्ज कराएं विरोध
पूज्य गुरुदेव ने कहा कि जैन समाज, जैन श्रावक स्वविवेक से निर्णय लें कि जैन संत की हत्या के बाद उन्हें क्या करना है। आपको आंदोलन करना है तो अवश्य करें, जरूर करें, आवश्यक रूप से एक जुटता के साथ करें। आप सभी को शांति पूर्वक अहिंसक आंदोलन करते हुए अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाकर अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए। इस अवसर पर उपस्थित मुनिश्री प्रतीकसागर महाराज ने सभी श्रावकों को एकजुट होने का आदेश देते हुए कहा कि जब हमारा धर्म, हमारी संस्कृति, हमारे साधु संत खतरे में हों तो हमारा मन कैसे शांत रह सकता है। इस संकट की घड़ी में सभी श्रावकों को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। ज्ञात हो कि विगत दिवस कर्नाटक प्रांत में जैनाचार्य कामकुमार नंदी महाराज की हत्या के विरोध में आंदोलन को रूपरेखा बनाने के लिए भिण्ड जैन समाज की एक बैठक आचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज एवं मुनिश्री प्रतीकसागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित की गई थी।













Add Comment