दिगम्बर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व 28 अगस्त से 6 सितम्बर तक पश्चिम बंगाल के चितरंजन मिहिजाम स्थित श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मनाया जाएगा। इस दौरान दस दिवसीय धर्मिक आयोजन, उपवास, अभिषेक, शांतिधारा और रथोत्सव के कार्यक्रम आयोजित होंगे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
दिगम्बर जैन समाज के संयम, तप और त्याग का पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व 28 अगस्त से प्रारंभ हो रहे हैं। प्रतिष्ठाचार्य पंडित विनोद पगारिया ने बताया कि यह दस दिवसीय पर्व 6 सितम्बर तक चलेगा। पश्चिम बंगाल के चितरंजन मिहिजाम स्थित श्री पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में उनके तत्वावधान में विविध आयोजन होंगे।
पर्यूषण पर्व के तहत प्रत्येक दिन विशेष धर्मों का पालन किया जाएगा:
• 28 अगस्त: उत्तम क्षमा धर्म
• 29 अगस्त: उत्तम मार्दव धर्म
• 30 अगस्त: आर्जव धर्म
• 31 अगस्त: सत्य धर्म और भगवान पुष्पदन्त जी मोक्ष कल्याणक
• 1 सितम्बर: शौच धर्म
• 2 सितम्बर: संयम धर्म और सुंगध दशमी पर्व
• 3 सितम्बर: उत्तम तप धर्म
• 4 सितम्बर: उत्तम त्याग धर्म
• 5 सितम्बर: उत्तम आकिंचन धर्म
• 6 सितम्बर: उत्तम ब्रह्यचार्य धर्म, अनन्त चतुदर्शी और वासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक
इस अवसर पर नगर के प्राचीन मंदिरों जैसे आदिनाथ दिगम्बर जूना मंदिर, चन्द्रप्रभु मंदिर, गांधियों का मंदिर, सेठों का मंदिर, सोनियों का मंदिर, भगवान ऋषभदेव पगल्याजी जल मंदिर, अतिशय क्षेत्र योगेंद्र गिरी, श्री शांतिनाथ मंदिर सिद्धी रेजीडेन्सी, अजीतनाथ मंदिर गोवाड़ी में प्रतिदिन प्रातः श्रद्धालुओं द्वारा जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की जाएगी। इसके बाद नव देवता पूजा, देव शास्त्र गुरु पूजा, मूलनायक भगवान की पूजा, सोलह कारण पर्व पूजा, पंचमेरू पूजा तथा दशलक्षण विधान के बाद तत्वार्थ सूत्र का वांचन किया जाएगा। रात्रि में जिनेन्द्र भगवान की आरती उतारी जाएगी।
8 सितम्बर को एक रथ और 9 सितम्बर को दो रथ निकाले जाएंगे
समाज के सेठ महेश नोगमिया ने बताया कि पर्व के तहत भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी 5 सितम्बर और भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी 6 सितम्बर को रात्रि में जिन प्रतिमा और जिनवाणी को प्राचीन काष्ठ निर्मित पालकी में विराजित कर पालकियाँ निकाली जाएंगी। 7 सितम्बर को पूर्णिमा क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। इसके पश्चात रथोत्सव पर्व के तहत 8 सितम्बर को एक रथ और 9 सितम्बर को दो रथ निकाले जाएंगे। समूचे वागड़ मेवाड़ क्षेत्र में पर्यूषण पर्व श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर जैन श्रद्धालु निराहार रहकर उपवास की तप साधना करेंगे।













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