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सम्मेद शिखरजी पर्वत वन्दना कर जयपुर लौटा 1100 जैन बन्धुओं का जत्था-समाज बन्धुओं ने किया स्वागत: दिगम्बर जैन पद यात्रा संघ ने 366 समाज बन्धुओं को करवाई नि: शुल्क यात्रा


सारांश

आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के महापारणा महाप्रतिष्ठा महामहोत्सव में शामिल होने एवं शाश्वत सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी की सामूहिक पर्वत वन्दना करने जयपुर से 26 जनवरी को स्पेशल ट्रेन अन्तर्मना एक्सप्रेस द्वारा सम्मेद शिखरजी गया 1100 यात्रियों का दल जयपुर लौट आया।


जयपुर. साधना के शिखर पुरुष 557 दिवसीय सिंहनिष्क्रीडित व्रत के साधक साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के महापारणा महाप्रतिष्ठा महामहोत्सव में शामिल होने एवं शाश्वत सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी की सामूहिक पर्वत वन्दना करने जयपुर से 26 जनवरी को स्पेशल ट्रेन अन्तर्मना एक्सप्रेस द्वारा सम्मेद शिखरजी गया 1100 यात्रियों का दल जयपुर लौट आया। जयपुर लौटने पर गांधीनगर रेलवे स्टेशन पर स्थानीय समाज बन्धुओं ने यात्रियों का भावभीना स्वागत किया। यात्रा दल में शामिल यात्रियों ने भगवान पार्श्वनाथ एवं आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के जयकारों के साथ शश्वत सर्वोच्च तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की 27 किलोमीटर की पद वन्दना की।

देश भर के जैन बंधु पहुंचे

यात्रा दल के संयोजक विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि इस यात्रा दल में जयपुर सहित भुज कच्छ गुजरात, इन्दौर, मंदसौर, दिल्ली, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़,ब्यावर, अजमेर, बांसवाडा,कोटा, उदयपुर, जलगांव महाराष्ट्र, मथुरा,आगरा सहित पूरे देश से जैन बन्धु शामिल हुए।श्री जैन के मुताबिक श्री दिगम्बर जैन पद यात्रा संघ जयपुर के बैनर तले संरक्षक सुभाष चन्द जैन, मुख्य संयोजक शैलेन्द्र शाह चीकू एवं रेलवे समन्वयक आर के जैन के नेतृत्व में शनिवार रात्रि 1.30 बजे महिला पुरुष यात्रियों का जत्था भगवान पार्श्वनाथ एवं आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के जयकारों के साथ तेरापंथी कोठी धर्मशाला से पैदल रवाना हुआ। इससे पूर्व दल के सदस्यों ने दिन में आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के महापारणा महामहोत्सव में सहभागिता निभाई ।

इस तरह की यात्रा

श्री जैन ने बताया कि 27 किलोमीटर की इस पर्वत वन्दना करने के लिए पैदल रवाना हुए जत्थे में पुरुषों ने सफेद वस्त्र,सिर पर राजस्थानी पगड़ी,गले में पचरंगा दुपट्टा तथा महिलाओं ने केसरिया साड़ी पहन रखी थी। हाथों में लकड़ी की खण्डी तथा हाथ में अष्ट द्रव्य की सामग्री की थैली लेकर रवाना हुए इस जत्थे के श्रद्धालुओं ने रवानगी से पूर्व पर्वत वन्दना के समय अन्न,जल त्याग का संकल्प लिया। सघन जंगल व वन क्षेत्र के बीच बनी हुई सीमेंट की पगडन्डी पर जयकारा लगाता यह जत्था लगभग 8 किलोमीटर की ऊंचाई पर सर्व प्रथम चौपड़ा कुण्ड पहुचा जहां पर दिगम्बर जैन मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन लाभ प्राप्त किए।

तत्पश्चात अगले दिन प्रातः 5.30 बजे के लगभग पर्वत पर गौतम गणधर स्वामी के पहले टूंक/टोकडे पर यात्रा दल पहुंचा। पर्वत पर पहुंचते ही यात्रियों में हर्ष की लहर दौड़ गई। तत्पश्चात पर्वत से मोक्ष गए 20 तीर्थंकरों सहित 24 तीर्थंकरों की कूट के चरणों के क्रमशः दर्शन कर, कूट का अष्ट द्रव्य का अर्घ्य चढ़ाते हुए श्रद्धालु आगे बढ़ते रहे। बीच में श्वेताम्बर जैन मंदिर जो कि जल मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, के दर्शन लाभ किये। अन्त में स्वर्ण भद्र कूट पर भक्ति भाव से भगवान पार्श्वनाथ के चरणों की पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने संरक्षक सुभाष चंद जैन, मुख्य संयोजक शैलेन्द्र शाह चीकू,यात्रा संयोजक प्रकाश गंगवाल, सूर्य प्रकाश छाबड़ा,अमर चन्द दीवान खोराबीसल, विनोद जैन कोटखावदा, विनेश सोगानी, मनीष लुहाड़िया,जिनेन्द्र जैन के नेतृत्व में भगवान के चरणों के अभिषेक कर आरती की।इस मौके पर

शकुन्तला पाण्डया, दीपिका जैन कोटखावदा,ऊषा दीवान,प्रिति सोगानी सहित संघ के सलिल जैन, राजेन्द्र जैन मोजमाबाद,राजकुमार बड़जात्या, पवन जैन नैनवां,महेश जैन,विक्रम पाण्डया, मयंक जैन,दीपा गोधा ,सोभाग मल जैन,अशोक पाटोदी ,विजय बैनाडा,सहित सभी यात्रियों ने भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से पूरे पर्वत को गुंजायमान कर दिया। यात्रियों ने स्वर्ण भद्र कूट पर अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज द्वारा किए गए 557 दिन की तप स्थली व विश्राम स्थली का अवलोकन कर अपने आप को धन्य महसूस किया। तत्पश्चात यात्री गण एक एक करके नीचे की ओर प्रस्थान करने लग गए। नीचे उतरने पर लकड़ी की डण्डी का काफी सहारा मिला।यात्री गण दोपहर 1.00 बजे से ही पर्वत से नीचे तलहटी पर पहुंचने लग गये। देर रात्रि में 10.00 बजे तक यात्रीगण घने जंगल से गुजरते हुए टार्च की रोशनी में नीचे पहुंचे।

पूरे दिन उपवास किया

पर्वत वन्दना के दिन अधिकतर यात्रियों ने पूरे दिन का उपवास किया। बच्चों व बिमारी से पीड़ित श्रावकों ने दूध,चाय, फलाहार,सूखे मेवे आदि ग्रहण किए। रात्रि में गर्म पानी से यात्रियों ने पैर धोए। इस तरह से 27 किलोमीटर मार्ग की यह पवित्र पहाड़ की वन्दना पूर्ण हुई।

आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया

सोमवार, 30 जनवरी को आचार्य प्रसन्न सागर महाराज की महोत्सव स्थल पर प्रवेश के समय पचरंगे जैन ध्वज के साथ भव्य अगवानी की। यात्रा दल ने गुणायतन पहुंच कर मुनि प्रमाण सागर महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।इस मौके पर चल रहे शंका समाधान कार्यक्रम में गुणायतन की ओर से संरक्षक सुभाष चंद जैन, संयोजक विनोद जैन कोटखावदा का विशेष सम्मान किया गया। इससे पूर्व प्रातः तेरापंथी कोठी स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में देव दर्शन के बाद आचार्य विशद सागर महाराज के दर्शन लाभ प्राप्त कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य श्री एवं जयपुर गौरव मुनि विशाल सागर महाराज ने जयपुर प्रवास के संस्मरण बताते हुए संरक्षक सुभाष चंद जैन, मुख्य संयोजक शैलेन्द्र शाह चीकू, संयोजक विनोद जैन कोटखावदा सहित सभी संयोजकों एवं मैना गंगवाल को सम्मान स्वरूप प्रतीक चिन्ह भेंट किया।

रविवार को दोपहर बाद पर्वत से नीचे उतर कर महाप्रतिष्ठा महामहोत्सव में आरती, भक्ति संध्या व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। सोमवार को तलहटी के मंदिरों के दर्शन लाभ लिए। यात्रा दल बुधवार को जयपुर लौटा । संरक्षक सुभाष चंद जैन के मुताबिक यात्रा के दौरान पद यात्रा संघ की ओर से यात्रा के दौरान बस, आवास, भोजन सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई । मार्ग में आगरा, कानपुर, इलाहाबाद,गया, कोडरमा जैन समाज द्वारा यात्रियों का भावभीना स्वागत किया गया।

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